उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दिल्ली पुलिस का वकील नियुक्त किया गया


तुषार मेहता होंगे उत्तर पूर्वी दिल्ली हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस के वकील

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा के एक मामले में दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को दिल्ली पुलिस का वकील नियुक्त किया है. बता दें कि काफी समय तक इस बात पर केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच विवाद चल रहा था कि दिल्ली पुलिस का दिल्ली हाई कोर्ट में विशेष वकील कौन होगा यह चुनी हुई सरकार तय करेगी या उपराज्यपाल. दिल्ली सरकार का कहना था कि 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट और 2018 में सुप्रीम कोर्ट की संवेधानिक बेंच  यह साफ कर चुकी है कि वकील की नियुक्ति चुनी हुई सरकार का अधिकार क्षेत्र है, और उपराज्यपाल स्वतंत्र रूप से इस मामले में कोई नियुक्ति नहीं कर सकते है. 

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शुक्रवार को दिल्ली सरकार के स्टैंडिंग काउंसिल राहुल मेहरा ने दिल्ली हाईकोर्ट को सूचना दी कि अब मामला सुलझा लिया गया है. राहुल मेहरा ने कोर्ट को बताया ‘ दिल्ली के गृहमंत्री सत्येंद्र जैन और दिल्ली पुलिस के डीसीपी राजेश देव के बीच लिखित संवाद हुआ है जिसमें गृह मंत्री सत्येंद्र जैन ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर और स्पेशल काउंसिल की नियुक्ति को मंजूरी दी है’ (जिनकी नियुक्ति LG चाहते थे)

राहुल मेहरा ने कोर्ट को दिल्ली के गृह विभाग की तरफ से दिल्ली पुलिस के डीसीपी को भेजी गई चिट्ठी भी दिखाई जिसमे दिल्ली सरकार ने दिल्ली पुलिस का पक्ष अदालत में रखने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अन्य की नियुक्ति कर दी गयी है.

अब इस मामले में दिल्ली पुलिस का पक्ष रखने के लिए स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर/स्पेशल कॉउन्सिल रखेंगे.

  1. तुषार मेहता, सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया
  2. मनिंदर आचार्य, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल
  3. अमन लेखी, एडिशनल सॉलिसिटर जनरल
  4. अमित महाजन, सीनियर स्टैंडिंग कॉउन्सिल
  5. रजत नायर

क्या है मामला

फरवरी-मार्च में उत्तर पूर्वी दिल्ली में दंगे हुए थे. इस मामले में दिल्ली पुलिस ने एक 25 साल की MBA की छात्रा को 9 अप्रैल को गिरफ़्तार किया था और उस पर  UAPA एक्ट लगाया गया था. जिसके बाद आरोपी के भाई की तरफ से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी है.

याचिकाकर्ता का कहना है. UAPA एक्ट मैं गिरफ्तारी हुई है इसलिए विशेष कोर्ट ही इस मामले कस्टडी के आदेश दे सकती है. लेकिन क्योंकि लॉक डाउन के चलते कोर्ट की कार्रवाई निलंबित चल रही थी इसलिए उनकी बहन को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है.



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