Wednesday, August 12, 2020
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कई बार संकटों से घिरे अमिताभ बच्चन, हौसले से ढहाई मुसीबत की हर ‘दीवार’

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नई दिल्ली: अमिताभ का मतलब होता है, ऐसी ज्योति जो कभी नहीं बुझे. अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) अपने नाम को सार्थक करते हैं. अमिताभ के जीवन में बहुत सी चुनौतियां आईं. कई बार संकटों के बादल घिरे, लेकिन अमिताभ बच्चन के हौसले के आगे मुसीबत की हर दीवार ढह गई. बता दें, अमिताभ कल (11 जुलाई) करोना पॉजिटिव पाए गए, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया और आज से 38 साल पहले भी जुलाई महीने में ही वह फिल्म ‘कुली’ के दौरान बुरी तरह से घायल हो गए थे.  

बता दें, साल 1982 में फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान अमिताभ बच्चन बुरी तरह घायल हो गए थे. उनका ऑपरेशन करना पड़ा था. तब पूरे देश ने उनकी सलामती के लिए दुआ की थी. अमिताभ ने मौत को मात दी और फिर सुनहरे पर्दे पर लौटे. अब 38 साल बाद एक बार फिर अमिताभ कोरोना संक्रमित हो कर अस्पताल पहुंचे हैं. पूरे देश को भरोसा है कि इस बार भी अमिताभ की विजय होगी. महामारी हारेंगे, महानायक जीतेंगे.

जो जख्मों से हार नहीं मानता, जो आंधियों के बीच पर्वत सा टिका रहता है… वो महानायक कहलाता है. इसलिए अमिताभ बच्चन महानायक हैं. उनकी छवि लार्जर दैन लाइफ है. अमिताभ बच्चन फिल्म इंडस्ट्री के शहंशाह हैं, लेकिन इस शहंशाह के जीवन की राह में सिर्फ फूलों भरे गलीचे नहीं बिछे थे. उन्होंने हौसले के संबल के साथ संघर्ष का अग्निपथ भी पार किया.

वो साल 1982 था. बेंगलुरु के पास फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग हो रही थी. एक्टर पुनीत इस्सर और अमिताभ बच्चन के बीच फाइटिंग सीन था. अचानक वो हुआ, जिसके बारे में किसी ने कल्पना तक नहीं की थी. इस सीन में अमिताभ बच्चन के पेट में चोट लगी. अमिताभ की तबीयत इतनी ज्यादा बिगड़ी कि उन्हें मुंबई ले जाना पड़ा. चोट की वजह से अमिताभ की आंत फट गई थी. मुंबई में अमिताभ के पेट का ऑपरेशन हुआ. उनकी हालत बहुत नाजुक थी. उनके शरीर से काफी खून निकल चुका था. वजन बहुत गिर गया था. 

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कहा जाता है कि अमिताभ बच्चन की स्थिति की इतनी ज्यादा खराब हो गई थी कि डॉक्टरों ने उनके परिवार से कहा था कि वो आखिरी बार मिल लें. उस दौरान जया बच्चन अस्पताल से सिद्धिविनायक मंदिर तक रोज पैदल जाती थीं, ये दूरी करीब छह किलोमीटर थी. कई महीने तक अमिताभ का इलाज चला, लेकिन हौसले और जीवट से भरे महानायक ने मौत को मात दी और एक बार फिर से सुनहरे पर्दे पर लौटे. उन्होंने ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग पूरी की और ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही. 

बताया जाता है कि ‘कुली’ की जो स्क्रिप्ट पहले तैयार की गई थी, उसके मुताबिक फिल्म के अंत में अमिताभ बच्चन के किरदार की मौत हो जाती है, लेकिन अमिताभ जब शूटिंग में जख्मी हो गए, उसके बाद डायरेक्टर मनमोहन देसाई ने फिल्म का क्लाइमेक्स बदल दिया. मनमोहन देसाई ने कहा कि जिस हीरो ने असल जिंदगी में मृत्यु को परास्त कर दिया है, उसे फिल्म में मरता हुआ दिखाना सही नहीं होगा. 1982 में ‘कुली’ के हादसे के बाद जब अमिताभ बच्चन अस्पताल में दाखिल थे, तो देश के लाखों लोगों ने उनकी सलामती के लिए दुआ की. अमिताभ के फैंस ने मंदिरों में पूजा पाठ किया. तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी उन्हें देखने गई थीं.

अब आज 34 साल बाद एक बार फिर सारा देश अपने चहेते सुपरस्टार के लिए दुआ कर रहा है. अमिताभ बच्चन 11 जुलाई को कोरोना पॉजिटिव पाए गए. मुंबई के नानावती अस्पताल उनका इलाज चल रहा है. करोड़ों प्रशंसक अमिताभ बच्चन के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. सबको विश्वास है कि कोई भी वायरस इतना ताकतवर नहीं हो सकता है कि वो अमिताभ बच्चन को हरा पाए, क्योंकि महानायक हारा नहीं करते. 

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