Friday, August 14, 2020
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कोरोना: देश के 49 जिलों में 80% केस, कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं, रिकवरी रेट 62% पहुंचा

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नई दिल्‍ली: तकरीबन एक महीने बाद स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोरोना वायरस को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की और भारत की बेहतर हालत का हवाला दिया. सरकार के मुताबिक रिकवरी रेट अब बढ़कर 62.09% हो चुका है. भारत में कोरोना के शिकार 7 लाख से ज्यादा मरीज हैं और रोजाना 20 हजार से ज्यादा मामले दर्ज हो रहे हैं लेकिन मंत्रालय का दावा है कि भारत में कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं हुआ है. स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता राजेश भूषण के  मुताबिक 733 जिलों वाले देश में अकेले 49 जिलों में 80 फीसदी से ज्यादा मामले हैं. इसीलिए इसे लोकल आउटब्रेक कहना ठीक है.‌

रिसर्च के स्तर पर भारत ने अब तक क्या हासिल किया है इस बारे में भी स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी दी:

कोरोना वैक्सीन और भारत 
दुनिया में 100 से ज्यादा वैक्सीन बन रही हैं, जिनमें से दो भारतीय हैं. भारत बायोटेक और कैडिला का नाम लेते हुए सरकार ने अपडेट किया कि इनकी एनिमल स्टडी पूरी हो‌ चुकी हैं. ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी और जगह तय हैं- ट्रायल अभी शुरू होने हैं. जो इस हफ्ते में शुरू हो जाएंगे.

5 अगस्त को वैक्सीन आएगी या नहीं?
इस सवाल पर आईसीएमआर की वैज्ञानिक डॉ निवेदिता गुप्ता ने बताया कि ट्रायल के काम में तेजी लाने के लिए ये तारीख बताई गई. इस तारीख पर वैक्सीन लांच होती नहीं दिखती. 

प्लाज्मा थेरेपी क्या वाकई रामबाण साबित हो रही है?
ये जांचने के लिए आईसीएमआर देश के अलग-अलग अस्पतालों में ऐसे 456 मरीजों पर स्टडी कर रहा है जिन्हें ये थेरेपी दी गई. 400 मरीज रजिस्टर हो चुके हैं . कुछ दिनों में इसके नतीजे आ जाएंगे. 

आंकड़ों ‌में कोरोना –
एक्टिव केस, रिकवर केस से आधे हैं- दो लाख का अंतर. 

भारत की 25% आबादी जो 45 से 75 वर्ष की है उनमें 80% से ज्यादा कोरोना वायरस से मौतें हुई हैं.

21 दिन में मामले दोगुने हो रहे हैं. 

8 राज्यों में 90% से ज्यादा मरीज हैं. 

86% मौतें 6 राज्यों में हुई हैं. 

दिल्‍ली-एनसीआर
राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कोरोना की हालत में सुधार है. प्रति 10 लाख की आबादी पर 35 हजार से ज्यादा टेस्ट 8 जुलाई तक हो गए. 1 जून को 4456  बेड्स थे, आज 15096 बेड्स हैं और 10 हजार बेड खाली हैं. 

हाल ही में बाजार में कोरोना को लेकर आई दो दवाओं पर सरकार की नजर है.‌ रेमडिसिविर और फेबीफ्लू की कालाबाजारी की खबरों पर सरकार सख्त हुई है.‌

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने दवा बनाने वाली कंपनियों से कहा है कि अपनी वेबसाइट पर हेल्पलाइन नंबर डालें जिससे जरूरतमंद मरीज और अस्पताल दवा के लिए सीधे संपर्क कर सकें और बाजार में यह दोगुने-तिगुने दामों पर ना बिके.‌





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