क्यूँ और किसके लिए गूगल ने बदला अपना लुक

गूगल आज भारत की पद्मभूषण पुरस्कृत शख्सियत होमी व्यारावाला का जन्मदिन मना रहा है. आखिर कौन हैं ये महिला जिसे गूगल इस तरह याद कर रहा है.

होमी व्यारावाला भारत की पहली महिला फोतोग्राफेर हैं. आज होमी का 104वां जन्मदिन है. 13 दिसम्बर 1993 को जन्मी होमी को गूगल ने ‘फर्स्ट लेडी ऑफ द लेंस’ के तौर पर सम्मानित किया है. इतना ही नही इस ख़ास मौके पर गूगल ने उनका डूडल बनाकर उन्हें श्रद्धांजली दी है.

होमी का जन्म गुजरात के नवरासी में एक मध्यम वर्गीय पारसी परिवार में होमी हाथीराम के नाम से हुआ था. उनके पिता उर्दू रंगमंच के अभिनेता थे. लेकिन जन्म के कुछ वक़्त बाद वो मुंबई आ गयी और फिर वहीँ उनका लालन पालन हुआ. होमी ने फोटोग्राफी की शुरुवात अपने दोस्त मानेकशां व्यारवाला के साथ की. सबसे पहले मानेकशा ने ही उन्हें फोटोग्राफी करना सिखाया, बाद में उन्होंने जे.जे. स्कूल ऑफ आर्ट से फोटोग्राफी की बारीकियां सीखी. होमी ने साल 1930 में पेशेवर फोटोग्राफर के तौर पर अपने करियर की शुरुवात की. ये वो दौर था जब कैमरा खुद एक नयी और अजूबी चीज़ था, उसपर एक औरत का इसे इस्तेमाल करना हर किसी के लिए चर्चा का विषय था.

होमी ने अपनी तस्वीरों के माध्यम से परिवर्तनशील राष्ट्र के सामाजिक तथा राजनैतिक जीवन को और उनमे आये बदलावों को दिखाने की कोशिश की. उनकी तस्वीरों में नेहरू थे, तो माउंटबेटन व दलाई लामा के भारत में प्रवेश की तस्वीरों पर भी ख़ास काम किया गया था.

होमी ने कई अद्भुत तस्वीरों को अपने कैमरा की नज़र से क़ैद किया जैसे कि  16 अगस्त 1947 को लाल किले पर पहली बार फहराये गये झंडे की तस्वीर. प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु और लाल बहादुर शास्त्री जैसे नेताओं की अंतिम यात्रा की तसवीरें भी शामिल हैं.

उनहोंने सिगरेट पीते हुए जवाहरलाल नेहरू और उनके साथ भारत में तत्कालीन ब्रिटिश उच्चायुक्त की पत्नी सुश्री सिमोन की मदद करते हुए एक तस्वीर ली थी जिसने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री की एक अलग ही छवि दर्शायी.

होमी की पहली तस्‍वीर बॉम्बे क्रोनिकल में प्रकाशित हुई जिसमें उन्‍हें प्रत्‍येक फोटो के लिए एक रुपया मिला था. शादी के बाद वह अपने पति के साथ दिल्‍ली आ गईं और ब्रिटिश सूचना सेवाओं के कर्मचारी के रूप में काम करने लगी. जिसके बाद उन्होंने स्‍वतंत्रता के दौरानबहुत साडी यादगार तसवीरें ली. द्वितीय विश्वयुद्ध के हमले के बाद, उन्‍होंने इलेस्‍ट्रेटिड वीकली ऑफ इंडिया मैगजीन के लिए 1970 तक काम किया. उनके कई फोटोग्राफ टाईम, लाईफ, दि ब्‍लेक स्‍टार तथा कई अन्‍य अन्‍तरराष्‍ट्रीय प्रकाशनों में फोटो-कहानियों के रूप में प्रकाशित हुए हैं.

उनकी सारी तसवीरें “डालडा13”(DALDA 13) के उपनाम से छपती थी. इसके पीछे उनका कहना था कि वो 13 साल की उम्र में अपने पति से पहली बार मिली थी और उनकी पहली कार का नंबर “DLD 13” था.

होमी के काम और जीवन के बारे में सबीना गडिहोक ने अपनी पुस्‍तक “इन्डिया इन फोकस-कैमरा क्रोनिकल ऑफ होमी व्‍यारवाला” में काफी विस्तार से बताया है. देशभर के फोटोग्राफरों से किए गए साक्षात्‍कारों के आधार पर उनकी फोटो-आत्‍मकथा को तैयार किया गया है.

अपनी पति मानेकशां व्यारवाला के निधन के बाद 1970 में होमी व्यारावाला ने पेशेवर फोटोग्राफी से संन्यास ले लिया था. साल 2011 में उन्हें भारत सरकार ने पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया था.

जनवरी 2012 में वो अपने घर में बिस्तर से नीचे गिर गयी जिससे उनकी हड्डी में फ्रैक्चर हो गया. होमी को पहले से फेफड़ों में संक्रमण था. इस हादसे के बाद उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लागी और 15 जनवरी 2015 को उन्होंने आखरी सांस ली.