गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों से ट्रांसजेंडरों की भर्ती के लिए राय मांगी


प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

गृह मंत्रालय ने सभी अर्धसैनिक बलों को आगामी भर्ती परीक्षा में ट्रांसजेंडर श्रेणी को शामिल करने पर अपनी राय देने को कहा है. मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “इस मामले को लेकर लंबे समय से भ्रम की स्थिति है, लेकिन हमने सीएपीएफ से टिप्पणी मांगी है.” एक पत्र के अनुसार, गृह मंत्रालय ने सीएपीएफ (सहायक कमांडेंट) परीक्षा 2020 के नियमों में पुरुषों और महिलाओं के साथ तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडर को शामिल करने पर विचार किया है.

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अधिकारी ने कहा कि “हमने बलों को एक रिमाइंडर भी भेजा है, ताकि अंतिम रूप दिया जा सके.” इस बीच NDTV को पता चला है कि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल और सशस्त्र सीमा बल इस मुद्दे पर सावधानीपूर्वक परीक्षण कर रहे हैं. एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “चिकित्सा / भौतिक पहलुओं के अलावा, सामाजिक स्वीकार्यता, सामाजिक और व्यवहार संबंधी मुद्दों की भी जांच की जा रही है.”

राजपत्रित अधिकारी (जीओ) इन बलों में सहायक कमांडेंट के पद पर शामिल होते हैं और प्रवेश परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित की जाती है. इस वर्ष की शुरुआत में संसद में गृह मंत्रालय द्वारा रखे गए आंकड़ों के अनुसार, अर्धसैनिक बलों को 2,695 राजपत्रित अधिकारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है. अधीनस्थ अधिकारियों और अन्य रैंकों की संयुक्त कमी एक लाख के करीब बताई गई है. इन छह बलों की कुल स्वीकृत शक्ति 10 लाख से अधिक है, जिनमें से केवल तीन प्रतिशत महिलाएं हैं. 

सुप्रीम कोर्ट द्वारा महिला अधिकारियों के लिए एक स्थाई आयोग गठित करने के आदेश के चार महीने बाद बलों में विविधता लाने की कोशिश शुरू हो गई है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, लगभग 92 प्रतिशत ट्रांसजेंडर देश में किसी भी प्रकार की आर्थिक गतिविधि में भाग लेने के अधिकार से वंचित हैं. सन 2011 की जनगणना के अनुसार इस समुदाय के 4,90,000 लोग हैं.



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