दिल्ली के दंगों से निजामुद्दीन मरकज का कनेक्शन: मौलाना साद के फंड मैनेजर और फैजल फारूख के बीच अहम रिश्ते- जांच में हुए ये खुलासे


दिल्ली के दंगों से निजामुद्दीन मरकज का कनेक्शन, जांच में हुए कई खुलासे- प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

उत्तर पूर्वी दिल्ली के शिव विहार इलाके में राजधानी पब्लिक स्कूल में 24 फरवरी को हुए दंगे के मामले में दिल्ली पुलिस की एसआईटी ने बुधवार को चार्जशीट पेश की थी. अब जांच में पता चला है कि दिल्ली के दंगों से निजामुद्दीन मरकज का कनेक्शन है. राजधानी स्कूल के मालिक फैजल फारूक और मौलाना साद के फंड मैनेजर के बीच अहम रिश्ते हैं. मौलाना साद का एक रिश्तेदार भी फैजल के संपर्क में था. दंगे के दिन भी साद के करीबी और फैजल के बीच बात हुई थी.

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जांच में खुलासा जांच में खुलासा दंगों से पहले फैजल फारुख ने करोड़ों रुपए की प्रॉपर्टी यमुना विहार और आसपास के इलाके में खरीदी थी. इनमें एक प्रॉपर्टी आठ करोड़ रुपए की और एक प्रॉपर्टी 110 करोड़ की बताई गई है. क्राइम ब्रांच को शक है कि मरकज का पैसा फैजल के माध्यम से जायदाद में लगाया गया. फैजल के माध्यम से दंगाइयों में पैसे बांटने की जांच भी जारी है. फैजल के पास तीन पब्लिक स्कूल बताए गये हैं. फैजल के खिलाफ अपराध शाखा ने आरोप पत्र कोर्ट में कल ही दाखिल किया है. 

बताते चले कि हिंसा का मास्टरमाइंड राजधानी पब्लिक स्कूल का मालिक फैज़ल फारूक बताया गया है. पुलिस ने दावा किया है कि हिंसा बड़ी साजिश के तहत हुई और फैज़ल फारूक हिंसा के ठीक पहले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के कई नेताओं, पिंजरातोड़ ग्रुप, निज़ामुद्दीन मरकज़, जामिया कोआर्डिनेशन कमेटी और देवबंद के कुछ धर्मगुरुओं के संपर्क में था. यही नहीं, फैज़ल हिंसा ने ठीक एक दिन पहले देवबंद भी गया था. उसके मोबाइल से इस बात के सबूत मिले हैं.

यह मामला राजधानी पब्लिक स्कूल के बगल में डीआरपी स्कूल के मालिक और मैनेजर की शिकायत पर दर्ज हुआ था. चार्जशीट के मुताबिक दंगाइयों ने राजधानी पब्लिक स्कूल की छत पर बड़े पैमाने पर तेजाब, ईंटें, पत्थर, पेट्रोल और बम इकट्ठे कर लिए थे. वे इसे लोहे की बनी एक बड़ी गुलेल के सहारे फेंक रहे थे. यही नहीं इस भारी गुलेल से देशी मिसाइल भी दागी गईं. 

राजधानी पब्लिक स्कूल की छत से डीआरपी कॉन्वेंट स्कूल में उतरने के लिए रस्सियां डालीं गई थीं. दंगाई नीचे उतरे और डीआरपी स्कूल में आग लगा दी. स्कूल के कम्प्यूटर और महंगा सामान लूट लिया गया. इन लोगों ने पास ही एक दूसरी इमारत में भी आग लगा दी थी जिसमें अनिल स्वीट्स नाम की मिठाई की दुकान थी. इस दुकान का एक कर्मचारी दिलबर नेगी दुकान में फंस गया था. उसे ज़िंदा जला दिया गया था. 

हिंसा के इस मामले में फैज़ल फारूक समेत 18 लोग गिरफ्तार किए गए थे. जांच में पता चला कि ये पूरी साज़िश फैज़ल फारूक ने की थी. उसके इशारे पर ही डीआरपी कान्वेंट स्कूल, अनिल स्वीट्स और पास बनीं दो बड़ी पार्किंग को आग के हवाले किया गया था. पुलिस को स्कूल के गार्ड, मैनेजर और कर्मचारियों के अलावा कई गवाह मिले. हिंसा वाले दिन फैज़ल ने अपने स्कूल के बच्चों को सुबह ही घर भेज दिया था. पुलिस ने छत से लोहे की भारी गुलेल के अलावा विस्फोटक और अन्य चीज़ें बरामद की थीं.



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