भारतीय वैज्ञानिकों ने HCQ को लेकर लांसेट की रिपोर्ट पर खड़े किए सवाल


प्रतीकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली:

भारतीय वैज्ञानिकों ने HCQ को लेकर लांसेट की रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं.  वैज्ञानिकों ने कहा है कि WHO का क्लीनिकल ट्रायल रोकना हड़बड़ी में लिया गया फैसला है. CSIR के DG, IGIB के डायरेक्टर और चेन्नई मैथमेटिकल इंस्टिट्यूट के डायरेक्टर ने लांसेट में HCQ के ट्रायल के बाद उसके विपरीत असर को लेकर प्रकाशित रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए हैं, और रिपोर्ट का खंडन किया है. इस संबंध में WHO और लांसेट के एडिटर को पत्र भी लिखी गयी है. पत्र में कहा गया है कि HCQ के ट्रायल को रोका जाना ग़लत है. 

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लांसेट की रिपोर्ट में 20 दिसंबर से 14 अप्रैल के बीच कोविड के पीसीआर से कनफर्म्ड केस का विश्लेषण किया गया है.जबकि  चीन के वुहान में 31 दिसंबर 2019 को निमोनिया का केस सामने आया था. वहीं 5 जनवरी, 2020 डब्ल्यूएचओ ने नए वायरस पर पहली बीमारी फैलने की खबर प्रकाशित की थी. वहीं 20 जनवरी, 2020 को अमेरिका में पहला संक्रमण का मामला सामने आया था.ऐसे में 20 दिसंबर से आंकड़ों का विश्लेषण करना गलत है. साथ में लिए गए डेटा पर भी सवाल खड़ा किया है. 

बताते चले कि लांसेट की स्टडी के मुताबिक, 14888 अस्पताल में भर्ती कोविड के मरीजों को जब HCQ दिया गया तो इसका कोई फायदा नहीं दिखा बल्कि डेथ का रिस्क हाई हो गया और हार्ट संबधी समस्या दिखी.इसके बाद सेफ्टी के मद्देनज़र WHO ने HCQ के क्लीनिकल ट्रायल पर रोक लगा दी.



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