मोदी सरकार ने घोषित की 21वीं सदी की नई शिक्षा नीति, MHRD का बदला नाम


नई दिल्ली: मानव संसाधन विकास मंत्रालय (MHRD) का नाम अब शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) होगा. मोदी कैबिनेट (Modi Cabinet) की बैठक में ये फैसला किया गया है. शिक्षा मंत्री रमेश पो​खरियाल (Ramesh Pokhriyal) ने आज मंत्रालय की प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि मानव संसाधन मंत्रालय, अब शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा.

इसके साथ ही मोदी कैबिनेट की बैठक में नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दी गई है. प्रेस ब्रीफिंग में सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा, ‘ 21 वीं सदी की नई शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई है. 34 साल से शिक्षा नीति मे कोई परिवर्तन नहीं किया गया था. दुनिया के शिक्षाविद इसकी सराहना करेंगे.’

अब सिर्फ 12वीं में बोर्ड एग्जाम
नई शिक्षा नीति को कैबिनेट की हरी झंडी मिलने के साथ 34 साल बाद शिक्षा नीति में बदलाव किया गया है. नई शिक्षा नीति के तहत अब 5वीं तक के छात्रों को मातृ भाषा, स्थानीय भाषा और राष्ट्र भाषा में ही पढ़ाया जाएगा. बाकी विषय चाहे वो अंग्रेजी ही क्यों न हो एक सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ाया जाएगा.

अब सिर्फ 12वीं में बोर्ड का एग्जाम देना होगा. पहले 10वीं बोर्ड का भी एग्जाम अनिवार्य होता था, अब नहीं होगा.

9वीं से 12वीं क्लास तक सेमेस्टर में परीक्षा होगी. स्कूली शिक्षा को 5+3+3+4 फॉर्मूले के तहत पढ़ाया जाएगा.

कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल दोनों की होगी
ग्रेजुएट कोर्स की बात करें तो 1 साल पर सर्टिफिकेट, 2 साल पर डिप्लोमा, 3 साल पर डिग्री ​मिलेगी. अब कॉलेज की डिग्री 3 और 4 साल दोनों की होगी. 3 साल की डिग्री उन छात्रों के लिए जिन्हें हायर एजुकेशन नहीं करना है.

हायर एजुकेशन करने वाले छात्रों को 4 साल की डिग्री करनी होगी. उनके लिए एमए एक साल में करने का प्रावधान होगा. अब छात्रों को एमफिल नहीं करना होगा. एमए के छात्र अब सीधे पीएचडी कर सकेंगे.

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