स्‍पेशल ट्रेनों के कई दिनों बाद पहुंचने की खबरें झूठी, चार ट्रेनों ने ही लिया 72 घंटे से ज्‍यादा वक्‍त: रेलवे बोर्ड चेयरमैन


नई दिल्ली:

Coronavirus Pandemic: कोरोना वायरस की महामारी के दौरान स्‍पेशल ट्रेनों में श्रमिकों की मौत पर रेलवे बोर्ड के चेेेेयरमैन ने अफसोस जताया है. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा कि ट्रेन में हुई मौतों पर हमें अफसोस है लेकिन बिना सटीक आंकड़ों के संख्‍या को नहीं बताया जा सकता. कई श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों के कई दिनों बाद अपने निर्धारित स्‍थान पर पहुंचने की खबर को भी रेलवे ने गलत बताया. उन्‍होंंने कहा कि 3840 ट्रेनों में से 4 ट्रेन ही ऐसी हैं जिन्‍होंने लक्ष्‍य तक पहुंचने में 72 घंटे से ज़्यादा का वक़्त लिया. ये भी 4 दिन से ज़्यादा समय में पहुंच गई. उन्‍होंने साफ किया कि एक ट्रेन के 9 दिन में पहुंचने संबंधी खबर झूठी है. मंत्रालय के अनुसार, 3840 में से 1.8% ट्रेन यानी 71 ट्रेन ही डाइवर्ट की गईं और ये डायवर्सन भी 20-24 मई के दौरान ही हुआ. इसी दौरान अधिक व्‍यस्‍तता (congestion) रही. मंत्रालय के अनुसार, इस बीच 90% ट्रेन UP और बिहार जाने वाले ही थीं, इनमें से 3 दिन से ज़्यादा वक़्त सिर्फ 4 ट्रेनों ने लिया.

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रेलवे बोर्ड के चेयरमैन ने दावा किया कि पिछले हफ्ते 20 लाख मुसाफिरों  को हमने पहुंचाया औसतन रोजाना करीब 3 लाख. 3840 में से 3836 ट्रेनों ने 72 घण्टे से कम का वक़्त लिया. 90% यानी 3500 ट्रेन मेल एक्सप्रेस की एवरेज स्पीड से ज़्यादा पर गयी है, केवल 10% ट्रेन 5 घंटे या उससे ज़्यादा लेट हुई. मंत्रालय के अनुसार, श्रमिक स्‍पेशल ट्रेनों में 30 से ज़्यादा डिलीवरी करवाई गई है. अब श्रमिक ट्रेन की मांग कम हुई है. वक़्त और हालात बेहतर नहीं, जैसे खाना खिला सकते हैं, खिलाया है.उन्‍‍‍‍‍होंने बताया कि 10 घंटे के बैंड में ट्रेन चलाई गई ताकि पैसेंजर ठीक समय पर पहुंचे. ट्रेक व्‍यस्‍तता  (congestion) का यह भी एक कारण रहा. बिहार और यूपी से डिमांड अचानक आई और हमने 20-24 मई के दैरान औसतन 250 ट्रेन रोज़ाना चलाईं.





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