सुशांत की मौत की जांच CBI करेगी या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत की जांच के मामले में अपना फैसला किया सुरक्षित किया, सुप्रीम कोर्ट आदेश जारी करेगा कि जांच मुंबई पुलिस करेगी या सीबीआई. सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया और सभी पक्षों से कहा कि वह अपनी-अपनी दलीलें लिखित में भी गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में जमा करवा दें.

केंद्र सरकार ने दी ये दलील
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने सीबीआई जांच की जरूरत बताई. केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में दायर जवाब पर सवाल उठाया, कहा कि अब तक FIR दर्ज क्यों नहीं की मुम्बई पुलिस ने. केंद्र सरकार ने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की जरूरत है.  कहा कि मामले की जांच ईडी कर रही है जो कि एक केन्द्रीय जांच एजेंसी है, ऐसे में दूसरी एजेंसी राज्य सरकार की नहीं बल्कि केंद्र सरकार की ही होनी चाहिए जो कि सीबीआई है.

केंद्र सरकार के वकील तुषार मेहता ने कहा कि CRPC 174 के तहत दुर्घटना में हुई मौत की शुरुआती जांच बहुत कम समय तक चलती है. शव को देख कर और स्पॉट पर जाकर देखा जाता है कि मौत की वजह संदिग्ध है या नहीं. फिर FIR दर्ज होती है, लेकिन इस मामले में मुंबई पुलिस जो कर रही है, वह सही नहीं. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने अब तक 56 लोगों से पूछताछ की है. अब तक की गई महाराष्ट्र पुलिस की जांच के कोई मायने नहीं है. यह कानूनसम्मत नहीं है, क्योंकि पुलिस ने अभी तक इसमें FIR दर्ज नहीं की है.

रिया के वकील ने कही यह बात
रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) के वकील श्याम दीवान ने कहा है कि सीबीआई जांच बिना राज्य की मंजूरी के शुरू नहीं हो सकती है और इस मामले में जांच करने वाला पहला राज्य महाराष्ट्र है इसलिए महाराष्ट्र सरकार की मंजूरी के बिना सीबीआई जांच नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि पहले बिहार पुलिस का एफआइआर मुंबई पुलिस के पास ट्रांसफर हो, इसके बाद यदि महाराष्ट्र सरकार सीबीआई जांच की मंजूरी दे तो तभी सीबीआई जांच हो.

वकील ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना संतोषजनक जवाब दायर किया है जिसमें बताया गया है कि मुम्बई पुलिस सही तरीके से जांच कर रही है. मुंबई पुलिस 56 लोगों से पूछताछ कर चुकी है, इसलिए जांच मुंबई पुलिस के पास ही रहनी चाहिए. रिया के वकील ने यह भी कहा कि पटना में दर्ज FIR का घटना से कोई संबंध नहीं है, 38 दिन बाद पटना FIR दर्ज हुई, बिहार सरकार मामले में ज्यादा दखल दे रही है.

रिया के वकील ने कहा कि 25 जुलाई को दर्ज FIR का पटना में हुए किसी अपराध से संबंध नहीं. वकील श्याम दीवान ने पटना में दर्ज FIR पर सवाल उठाया, कहा कि बिहार का क्षेत्राधिकार नहीं. 38 दिन के बाद FIR दर्ज करने का औचित्य नहीं. FIR दर्ज होने के पीछे राजनैतिक वजह है. बिहार पुलिस ने एक ऐसे मामले के लिए FIR दर्ज की, जिसका पटना से कोई कनेक्शन ही नहीं. 

रिया के वकील ने कहा कि अगर मामले को पटना से मुंबई पुलिस के पास ट्रांसफर नहीं होगा, तो रिया को इंसाफ नहीं मिल पायेगा. वकील ने कहा कि बिहार पुलिस का इस मामले से कोई लेनादेना नहीं है लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री इस मामले में राजनैतिक लाभ लेने के लिए खुद ही सक्रिय हुए हैं.

वकील ने कहा कि रिया, सुशांत से प्यार करती थी, उसे ट्रॉल किया जा रहा है, उसको प्रताड़ित किया जा रहा है. बिहार सरकार के वकील ने महाराष्ट्र सरकार के सुप्रीम कोर्ट में दायर किए गए हलफनामे पर सवाल उठाया जिसमें कहा गया है कि 56 लोगों से पूछताछ हुई है. कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने अभी तक FIR दर्ज नहीं की है और इस संबंध में हलफनामे में कुछ भी नहीं कहा गया.

सुप्रीम कोर्ट ने रिया के वकील से पूछा कि क्या यह सही है कि आप भी CBI जांच चाहती थीं? रिया के वकील ने कहा कि FIR को पटना से मुंबई ट्रांफसर किया जाय, महाराष्ट्र सरकार जो चाहे करेगी. वह चाहे तो CBI को दे सकती है.

बिहार सरकार के वकील ने कहा कि बिहार पुलिस के एक IPS को मुंबई में क्वारेंटीन करने के नाम पर डिटेन कर के रखा गया. इन सब बातों को सुप्रीम कोर्ट को ध्यान में रखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार का इस मामले को लेकर रवैया क्या है.

ये हैं इस केस के वकीलों के नाम 
1 वकील मनिंदर सिंह बिहार पुलिस के लिए पेश हुए
2 वकील अभिषेक मनु सिंघवी महाराष्ट्र सरकार के लिए
3 वकील श्याम दीवान रिया के लिए
4 वकील विकास सिंह सुशांत के पिता के लिए पेश हुए

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