Friday, August 14, 2020
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ऐसा मंदिर जहां इंदिरा गाँधी को प्रधानमंत्री रहते हुए रोका गया था?

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भारत के प्रधानमंत्री को इस मंदिर में अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी गई, ऐसा सुन कर आपको आश्चर्य ज़र्रूर हुआ होगा. इसकी आगे की बात आपको बताते हैं की ओडिशा राज्य के शहर पुरी में श्री जगन्नाथ मंदिर हिन्दुओं का प्रसिद्ध मंदिर है, यह मंदिर भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत के स्वामी होता है। पुरी नगर श्री कृष्ण यानी जगन्नाथपुरी की पावन नगरी कहलाती है। वैष्णव सम्प्रदाय का यह मंदिर हिंदुओं की चार धाम यात्रा में गिना जाता है।

जगन्नाथ मंदिर का हर साल निकलने वाला रथ यात्रा उत्सव संसार में बहुप्रसिद्ध है। पुरी के इस मंदिर में तीन मुख्य देवता विराजमान हैं। भगवान जगन्नाथ के साथ उनके बड़े भाई बलभद्र व उनकी बहन सुभद्रा तीनों, तीन अलग-अलग भव्य और सुंदर आकर्षक रथों में विराजमान होकर नगर की यात्रा को निकलते हैं।आप भारत के किसी भी कोने में क्यों न रहते हों आपकी ये इच्छा जरूर रही होगी कि जिंदगी में एक बार जगन्नाथ मंदिर जरूर जाएं।

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भारत का हर हिन्दू ये चाहता है कि एक बार उसे भगवान जगन्नाथ के दर्शन का सौभाग्य जरूर प्राप्त हो। इस भव्य मंदिर की वास्तुकला के दर्शन लिए लोग दुनियाभर से आते हैं। लेकिन आपको इस बात का अंदाजा नहीं होगा कि वर्ष 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश की इजाजत नहीं दी गई थी। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि इस मंदिर में प्रवेश की इजाजत सिर्फ और सिर्फ सनातन हिन्दुओं को ही मिलती है।

इस मंदिर का प्रशासन सिर्फ हिन्दु, सिख, बौद्ध और जैन धर्म के लोगों को ही मंदिर में प्रवेश की अनुमति देता है। इसके अलावा दूसरे धर्म के लोगों और विदेशी लोगों के प्रवेश पर सदियों पुराना प्रतिबंध लगा हुआ है। इसलिए भारत की प्रधानमंत्री को भी इस मंदिर में अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी गई। यानी भारत का प्रधानमंत्री भी अगर हिन्दू नहीं है तो वो इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता है।

जगन्नाथ मंदिर के पुजारियों के मुताबिक इंदिरा गांधी हिन्दू नहीं बल्कि पारसी हैं। इसलिए 1984 में उन्हें इस मंदिर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई थी। मंदिर के प्रबंधकों के अनुसार इंदिरा गांधी का विवाह एक पारसी फिरोज जहांगीर गांधी से हुआ था। इसलिए विवाह के बाद वो तकनीकी रूप से हिन्दू नहीं रहीं। इसी वजह से उन्हें जगन्नाथ मंदिर में प्रवेश नहीं दिया गया।

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आपको बता दें कि इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा को गांधी सरनेम पंडित जवाहर लाल नेहरू से नहीं बल्कि फिरोज गांधी से मिला था। लेकिन इसके बाद भी फिरोज गांधी को कांग्रेस पार्टी की तरफ से वो सम्मान नहीं दिया गया जो इंदिरा गांधी, राजीव गांधी को मिला।

यह भी पढ़ें :क्या है तिरंगे में तीन रंगों का महत्व ?

फिरोज गांधी दुनिया में ऐसे एकलौते शख़्स थे जिसके ससुर दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के पहले प्रधानमंत्री हो और बाद में उसकी पत्नी और उसका पुत्र भी इस देश का प्रधानमंत्री बना हों। लेकिन फिर भी उनके बारे में किसी को भी ज्यादा कुछ पता नहीं होगा। आपको यहां ये भी बता दें कि फिरोज इंदिरा की शादी के बाद महात्मा गांधी ने अपना सरनेम दिया था।

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