देशभर में सबसे ज़्यादा बच्चे मध्यप्रदेश से लापत होते हैं, सामने आये चौंकाने वाले आंकड़े

मध्यप्रदेश में औसतन हर दिन 25 बच्चे लापता होते हैं, पूरे देश में ये आंकड़ा पश्चिम बंगाल के बाद सबसे ज़्यादा है. हालांकि राज्य सरकार कहती है 75 फीसद बच्चे वो ढूंढ लाती है बावजूद इसके आंकड़ों में कमी नहीं आ रही है. डिंडौरी ज़िले के बिजौरी ज़िले की कुवरिया बाई मरावी की जवान बेटी 3 सालों से लापता है. आरोप है कि गांव का एक शख्स उसे काम दिलाने दिल्ली लेकर गया लेकिन उसके बाद बिटिया वापस नहीं आई. पुलिस से शिकायत की लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. कुवरिया बाई ने बताया कि रामसिंह दो लड़कियों लेकर गया था. जिसमें एक तो वापस आ गई लेकिन उनकी बेटी नहीं आई. उसके बारे में कोई जानकारी नहीं है.

आपको बता दें कि डिंडौरी आदिवासी बहुल इलाका है. पुलिस कह रही है मानव तस्करी रोकने के लिए स्पेशल टीमें काम कर रही हैं. ज़िले के एसपी कार्तिकेयन के मुताबिक ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग रोकने के लिए हम बहुत काम कर रहे हैं. महिला सशक्तिकरण टीमें काम कर रही हैं. गांव में भी कहा गया है कि मज़दूरी करने सरपंच को बताकर जाना ताकि कोई घटना होने पर ट्रेस कर सकें.’ वहीं कांग्रेस गृहमंत्रालय के आंकड़ों के हवाले से कह रही है, पिछले साल मध्यप्रदेश में 8,503 बच्चे लापता हुए, जिसमें 6,037 लड़कियां और 2,466 लड़के हैं.

कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा मामा तो बच्चों की सुरक्षा करते हैं, लेकिन इस मामा के शासन में 8503 बच्चे गुम हो जाते हैं, 8500 परिवारों को पता नहीं उनके बेटा-बेटी कहां हैं. सुरजेवाला ने कहा कि सरकार इस बात में खुश होती दिख रही है कि इस लिस्ट में वो टॉप पर नहीं है.

गृहमंत्री भूपेन्द्र सिंह ने कहा सबसे ज़्यादा जो लड़कियां गायब हो रही हैं उसमें प.बंगाल से संख्या सबसे ज़्यादा है. उन्होंने दावा किया कि मध्यप्रदेश में जो गायब हुई हैं उसमें 75 फीसद वापस आ गई हैं, बाकी 25 फीसद के लिये कोशिश चल रही है. उम्मीद है इस 25 फीसद में कुंवरिया बाई की लाडली भी होगी. वैसे प्रदेश में ये हालात तब है जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई बच्चा चार महीने से ज्यादा समय से लापता है तो उससे जुड़े मामलों में विशेष निगरानी करना होगी. इन्हें मानव तस्करी मानकर सरकार जांच कराएगी.