PM Modi के इस चुनावी ‘अस्त्र’ के आस्ट्रेलियाई पीएम भी हुए मुरीद, लेकिन विपक्ष बिहार चुनाव को लेकर कितना तैयार

PM Modi के इस चुनावी ‘अस्त्र’ के आस्ट्रेलियाई पीएम भी हुए मुरीद, लेकिन विपक्ष बिहार चुनाव को लेकर कितना तैयार

PM Modi ने साल 2014 में होलोग्राम तकनीक का इस्तेमाल कर की थीं रैलियां

नई दिल्ली :

पीएम  नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने होलोग्राम तकनीकी का इस्तेमाल करके  साल 2014 में लोकसभा चुनाव में एक ही जगह से कई रैलियों को संबोधित किया था. ये तकनीकी कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच होने वाले  बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Election) में भी इस्तेमाल की जा सकती है. गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव  को लेकर आखिरकार गहमागहमी शुरू हो चुकी है. कोरोना वायरस और लॉकडाउन की वजह से चुप्पी साधे बैठे राजनीतिक दलों के सामने इस बार चुनाव प्रचार को लेकर बड़ी चुनौती है. क्योंकि बड़ी-बड़ी रैलियां करना और सोशल डिस्टैसिंग का पालन न करने पर इस संक्रमण को एक तरह से न्यौता ही देना होगा. पीएम नरेंद्र मोदी भी इस बार शायद ही रैली करें इन सब के बीच बीजेपी ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है. जिसको लेकर विपक्ष निशाना भी साध रहा है और साथ में परेशान भी उसकी साफ दिखाई दे रही है. गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) 7 जून यानी रविवार को तकनीकी का इस्तेमाल करते हुए ‘वर्चुअल’ रैली को संबोधित करेंगे. पहले यह रैली 9 जून को तय की गई थी. दावा किया जा रहा है कि इस रैली के माध्यम से 1 लाख लोगों तक बात पहुंचाई जाएगी. साथ ही जो लोग इस रैली को देखने के बजाए इन सुनना चााहते हैं उनके लिए अलग से व्यवस्था की जाए. रैली को BJP के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है.

लेकिन पीएम मोदी के पास ‘2014 वाला हथियार’

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी ने लगातार रैलियां करने का रिकॉर्ड बनाया था. इतना ही नहीं चुनाव के प्रचार के आखिर में उन्होंने एक साथ कई जगहों पर रैलियां करने के लिए होलोग्राम तकनीकी का इस्तेमाल किया था. इसमें एक जगह से कई रैलियों को संबोधित किया था. इस तकनीकी में 3डी का भी इस्तेमाल  होता है जिसमें ऐसा लगता था कि पीएम मोदी साक्षात मंच पर खड़े हो भाषण दे रहे हैं. कुल मिलाकर ऐसी ही तकनीकों का इस्तेमाल करने में बीजेपी आईटी सेल के लगो विशेषज्ञ हैं.

ऑस्ट्रेलिया के पीएम भी हुए तकनीकी के मुरीद

गुरुवार को हुए भारत-ऑस्ट्रेलिया शिखर सम्मेलन के दौरान जहां समोसा और खिचड़ी छाई रही वहीं साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान पीएम मोदी के ‘होलोग्राम’ तकनीक से किए गए चुनाव प्रचार का जिक्र करते हुए आस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा,’यह मुझे चौंकाता नहीं है कि इन परिस्थितियों में हम किस तरह से (वर्चुअल) मिलना जारी रखेंगे. आप उनमें से हैं, जिन्होंने होलोग्राम तकनीक का अपने चुनाव प्रचार में कई साल पहले इस्तेमाल किया था.  हो सकता है कि अगली बार हमारे पास यहां आपका एक होलोग्राम होगा.’

तेजस्वी यादव ने बीजेपी की वर्चुअल रैलियों पर साधा निशाना
बिहार में राजद नेता तेजस्वी यादव  ने ट्वीट किया, ‘कोरोना की संख्या लगभग 2 लाख पहुंच गई है. ग़रीब पैदल चल भूखे मर रहे हैं, लेकिन BJP डिजिटल रैली निकालेगी. भाजपा दुनिया की पहली ऐसी पार्टी है जो अपने लोगों के मरने पर जश्न मना रही है. जिस दिन BJP ग़रीबों की मौत का जश्न मनाएगी उसी दिन प्रतिकार में हम ‘गरीब अधिकार दिवस’ मनाएंगे.

विपक्ष कितना है तैयार 

इसमें कोई दो राय नहीं है कि तकनीकी के इस्तेमाल के मामले में पीएम मोदी देश में इस समय बाकी नेताओं से काफी आगे हैं और इसका पार्टी की कार्यशैली पर भी पड़ा है. बीजेपी का आईटी सेल इस समय बाकी पार्टियों की तुलना में ज्यादा दक्ष है. अगर कोरोना  वायरस के दौर में परंपरागत प्रचार के तरीकों जैसे रैलियां, रोड शो आदि पर रोक जारी रहती है तो विपक्ष के नेताओं की क्या रणनीति होगी. इतना तय है कि अगर सिर्फ ऑनलाइन चुनाव प्रचार की ही इजाजत मिली तो बीजेपी इसमें भारी पड़ सकती है. (इनपुट PTI से भी)

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