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क्या एक कोर्ट में विचाराधीन मामले पर दूसरे कोर्ट में भी केस कर सकते हैं ?

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क्या एक कोर्ट में विचाराधीन मामले पर दूसरे कोर्ट में भी केस कर सकते हैं Can a case pending in one court be tried in another court also
क्या एक कोर्ट में विचाराधीन मामले पर दूसरे कोर्ट में भी केस कर सकते हैं Can a case pending in one court be tried in another court also

क्या एक कोर्ट में विचाराधीन मामले पर दूसरे कोर्ट में भी केस कर सकते हैं ? ( Can a case pending in one court be tried in another court also? )

आमतौर पर लोगों के मन में कानून तथा कोर्ट को लेकर कई सवाल होते हैं. ऐसा ही एक सवाल है कि अगर किसी मामले में एक कोर्ट में केस विचाराधीन है, तो क्या उसी मामले में दूसरे कोर्ट में केस दर्ज कर सकते हैं. अगर आपके आपके मन में भी यही सवाल है , तो इस पोस्ट में आपके सवाल का जवाब मिल जाएगा.

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विचाराधीन मामले पर दूसरे कोर्ट में भी केस कर सकते हैं ?

विचाराधीन मामले पर आप दूसरे कोर्ट में केस नहीं कर सकते हैं. जबतक उस केस की सुनवाई नहीं हो जाती है. जब कोर्ट का किसी भी मामले में फैसला आ जाता है, इसके बाद आप उससे ऊपर की अदालत में इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकते हैं. इसके अलावा अगर आपको लगता है कि जिस कोर्ट में अभी मामला चल रहा है, उसमें आप आने जाने में असमर्थ हैं या कोई और कारण है. तो आप अपने केस को दूसरे कोर्ट में स्थानांतरित करने के लिए अर्जी लगा सकते हैं. अगर आपकी समस्या या कारण जायज है, तो आपका मामला दूसरे कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया जाता है.

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कैसे स्थानांतरित होते हैं कोर्ट केस-

दंड प्रक्रिया संहिता यानि Criminal Procedure Code 1973 [CrPC] के चैप्टर 31 में सेक्शन 406 से लेकर सेक्शन 412 तक का विवरण दिया गया है, जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के केस ट्रांसफर करने की पावर से के बारे में बताया गया है. जिनके अनुसार सुप्रीम कोर्ट को आपकी अर्जी से लगता है कि यहां न्याय प्रभावित हो सकता है, तो वह आपके केस को दूसरे कोर्ट में स्थानांतरित करने का अधिकार रखता है. इसके अलावा ऐसी ही शक्ति हाई कोर्ट के पास भी होती है, लेकिन वह सिर्फ अपने अधिनस्थ कोर्ट के मामले में ही केस को स्थानांतरित करने का अधिकार रखता है.

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इसकी साथ ही अगर आपकी अर्जी से लगता है कि यह केस स्थानांतरित करने का उचित कारण नहीं हो सकता. इसके अलावा ऐसी अर्जी कोर्ट का समय बर्बाद करने या तंग करने के लिए लगाई गई है. ऐसे में कोर्ट जुर्माना भी लगा सकता है.  

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.

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