उन्नाव गैंगरेप केस: अभी तक माननीय हैं विधायक जी, गिरफ्तार हुए पर सवाल अब भी बाक़ी, पढ़िए केस से जुड़ी ताज़ा जानकारी

उन्नाव गैंगरेप केस में आरोपी बीजेपी विधायक कुलदीप सेंगर के खिलाफ 260 दिन बाद केस दर्ज होने के बाद यूपी सरकार ने सीबीआई जांच का फैसला किया है. इस केस की जांच अब सीबीआई के हवाले कर दी गई है. इससे पहले कल हुई एसआईटी जांच पर पुलिस, प्रशासन और अस्पताल स्तर पर बड़ी लापरवाही सामने आई है. लेकिन आरोपी विधायक की गिरफ्तारी के सवाल पर यूपी के डीजीपी ओपी सिंह का कहना है कि वह अभी सिर्फ आरोपी हैं. उनकी गिरफ्तारी का फैसला सीबीआई करेगी.

आखिरकार नींद से जागा कानून

उन्नाव गैंग रेप केस में आरोपी विधायक कुलदीप सेंगर के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज करने के बाद आईपीसी की धारा 363 (अपहरण), 366 (अपहरण कर शादी के लिए दवाब डालना), 376 (बलात्‍कार), 506(धमकाना) और पॉस्‍को एक्‍ट के तहत मामला दर्ज किया है. बता दें कि SIT की शुरुआती रिपोर्ट के बाद कुलदीप सेंगर के ख़िलाफ़ FIR का फ़ैसला लिया गया है. इसके साथ ही ये भी तय किया गया है कि मामले की जांच CBI से कराई जाएगी.

एसआईटी के शुरुवाती जांच के बाद न दिर्फ़ विधायक खिलाफ केस दर्ज हुआ है बल्कि उन्नाव ज़िला अस्पताल के CMS और EMO यानी इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर को भी सस्पेंड कर दिया गया है. इनके अलावा ठीक से इलाज नहीं करने के आरोप में तीन डॉक्टरों के ख़िलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी. सफीपुर के सीओ को भी सस्पेंड करने का फ़ैसला किया गया है.

बाहुबल का प्रदर्शन करते दिखे विधायक

बुधवार रात बीजेपी के विधायक कुलदीप सेंगर लखनऊ में एसएसपी ऑफिस अपने कई समर्थकों के साथ गाड़ियों के पूरे लाव लश्कर के साथ पहुंचे थे. उनके समर्थकों का कहना था कि वो सरेंडर करने पहुंचेंगे, लेकिन विधायक कुलदीप सेंगर ने कहा कि मीडिया जहां बोलेगी वहां आऊंगा. उसके बाद वो समर्थकों के साथ वो वापस लौट गए. विधायक करीब 40 गाड़ियों के साथ आए थे और साफ है उन्होंने SSP ऑफिस के बाहर शक्ति प्रदर्शन किया.

तीन स्तर  की जांच के बाद क्या हासिल?

गौरतलब है कि गैंगरपे के इस केस के बारे में जानकारी देने के लिए यूपी के प्रधान सचिव गृह अरविंद कुमार और डीजीपी ओपी सिंह गुरुवार को मीडिया के सामने आए. अरविंद कुमार ने कहा कि इस मामले की जांच के लिए एसआईटी बनाई गई थी, जिसमें एडीजी लखनऊ जोन शामिल थे. उन्होंने पीड़िता, उसकी मां और आरोपी विधायक पक्ष के बयान दर्ज किए. तीन स्तर पर जांच की गई है. पहली जांच एसआईटी,  दूसरी डीआईजी जेल और तीसरी डीएम उन्नाव को सौंपी गई थी. इसमें कई स्तर पर लापरवाही सामने आई है.

डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि” ‘माननीय विधायक जी’ के खिलाफ दोष साबित नहीं हुआ है. उनके खिलाफ सिर्फ आरोप लगा है. इस केस की जांच की सिफारिश सीबीआई से की गई है. इस मामले की जांच अब सीबीआई ही करेगी. विधायक को गिरफ्तार करना है या नहीं इसका फैसला सीबीआई को ही करना है. हमने दोनों घटनाओं के संबंध में केस दर्ज कर लिया है.”

डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि विधायक जी के खिलाफ दोष साबित नहीं हुआ है. उनके खिलाफ सिर्फ आरोप लगा है. पीड़िता की मां की तहरीर के आधार पर उन पर आईपीसी की धारा 363, 366, 376, 506 और पॉक्सो कानून के तहत केस दर्ज किया गया है.

कोर्ट के दखल का असर

बता दें कि उन्नाव के इस बहुचर्चित गंगरेप मामले पर इलाहाबाद हाइकोर्ट ने ख़ुद संज्ञान लिया है और आज हाइकोर्ट इस मामले की सुनवाई करेगा. हाइकोर्ट ने इस मामले में एमिक्स क्यूरी भी नियुक्त किया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगले हफ़्ते सुनवाई करेगा. वहीं आरोपी विधायक की पत्नी ने कहा है कि लड़की झूठ बोल रही है. कोई बलात्कार नहीं हुआ है. मेरे पति निर्दोष हैं. दोनों का नार्को टेस्ट करा लिया जाए, जिससे सच सामने आ जाएगा.