जम्मू-कश्मीर में फलों की खेती पर कोरोना का असर, किसानों को भारी नुकसान

जम्मू-कश्मीर में फलों की खेती पर कोरोना का असर, किसानों को भारी नुकसान

श्रीनगर: कोविड-19 का प्रभाव जम्मू-कश्मीर की फलों की खेती पर लगातार पड़ता दिख रहा है. लॉकडाउन के कारण आलूबुखारे के कारोबार में 50% का घाटा हुआ है. हालांकि सरकार का दावा है कि हर मुमकिन मदद की जा रही है.

जम्मू-कश्मीर में इस वर्ष जनजीवन ही नहीं, बल्कि यहां फलों की खेती को भी कोविड की मार झेलनी पड़ रही है. माल तो पेड़ों पर तैयार है मगर उसे बेचने के लिए बाजार मुश्किल से मिल रहा है. कश्मीर सहित कोरोना वायरस बीमारी (COVID-19) के प्रसार को रोकने के लिए उठाए गए कदम इन व्यापारियों के लिए एक बड़ी बाधा बने हुए हैं. घाटी में बाजार, रिटेल और होलसेल दुकानें बंद हैं और किसान को इस कारण उसकी फसल में बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है.

कश्मीर के आलूबुखारे देशभर में भेजे जाते हैं. यह अपने स्वाद के कारण माना जाता है लेकिन इस साल आलबुखारा कम उगा. क्योंकि लॉकडाउन के कारण खेती सही से हो नहीं सकी.

मोहम्मद अफजल कहते हैं, “ हम आलूबुखारे की पैकिंग करते हैं और हर साल ये दिल्ली और मुंबई जाता है.लेकिन इस साल आलूबुखारा कम हुआ पिछले साल के मुकाबले ज​बकि हमारा कारोबार पूरी तरह से इस पर निर्भर है.

फलों के किसान इस कोविड के प्रसार से चिंतित हैं. वे मानते हैं कि इस बार इस बीमारी से काफी नुकसान हुआ. बाजार तो बंद थे ही लेकिन फलों को पेड़ों से उतारने के लिए मजदूर भी नहीं मिल रहे हैं. फल भी कम उग हैं. हर चीज महंगी पड़ती है. मजदूरी भी महंगी हुई है.

अब्दुल रजाक फलों के व्यापारी कहते हैं, ‘इस साल बहुत नुकसान हुआ. मजदूर भी नहीं मिलते, गाड़ी भी नहीं मिलती.’

सरकार किसानों की मदद कर रही है और श्रीनगर की स्थानीय मंडी में लाने या बाहर माल को बेचने की सुविधा दी जा रही है. सरकार ने किसानों तक संदेश पहुंचाया है कि जैसी ही उनका माल तैयार हो. उन तक जानकारी पहुंचाई जाए और उनका माल बिना किसी रुकावट के बाहर चला जाएगा. इतना ही नहीं, सरकार ने मुगल रोड को केवल फलों की ट्रांसपोर्टेशन के लिए खोल रखा है.

बता दें कि कश्मीर की आर्थिक व्यवस्था फलों के कारोबार पर निर्भर है और इस साल कोविड के कारण इस ट्रेड को काफी घाटा झेलना पड़ा है. मगर सरकार पूरी कोशिश में है कि इन किसानों को हर मुमकिन मदद दे सके.

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