दिल्ली सरकार ने लॉन्च किया मोबाइल एप, Delhi corona से पता चलेगा किस अस्पताल में खाली हैं बेड

दिल्ली सरकार ने लॉन्च किया मोबाइल एप, Delhi corona से पता चलेगा किस अस्पताल में खाली हैं बेड

अरविंद केजरीवाल ने डिजिटल प्रेस कांफ्रेंस कर दी जानकारी

नई दिल्ली:

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को डिजिटल प्रेस कांंफ्रेंस के जरिए एक मोबाइल एप ‘DELHI CORONA’ को लॉन्च किया. इस एप के माध्यम से यह जानकारी हासिल की जा सकती है कि दिल्ली के किस अस्पताल में कितने बेड खाली हैं. इस मौके पर सीएम ने कहा कि एक तरफ हमने आपके लिए इंतजाम किया हुआ है, एक तरफ मैं कहता हूं कि किसी चीज की कोई कमी नहीं है, दूसरी तरफ लोगों के फोन और मैसेज आते हैं कि मैं दर-दर भटक रहा हूं, बेड नहीं मिल रहा. केजरीवाल के अनुसार यह इंफॉर्मेशन का गैप है. केजरीवाल के अनुसार इस एप के माध्यम से इस गैप को खत्म करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में कोरोना के केस बढ़ रहे हैं लेकिन हमने इतना इंतजाम किया हुआ है कि आपके घर में अगर कोई बीमार होता है तो उसके लिए बेड ऑक्सीजन और आईसीयू सब का इंतजाम है. उन्होंने बताया कि आज 6731 बेड हैं दिल्ली में हैं जबकि 2631 मरीज़ हैं. 4100 बेड खाली पड़े हैं. लोग जाते हैं तो उनको पता नहीं होता कि उनको किस अस्पताल में बेड मिलेगा कहां ऑक्सीजन मिलेगी.

अरविंद केजरीवाल ने  DELHI CORONA मोबाइल एप को लॉन्च करते हुए बताया कि यह आपको सरकारी और प्राइवेट सभी अस्पतालों के बारे में बताएगा कि इस वक्त किस अस्पताल में कितने बेड खाली हैं और कितने भरे हुए हैं. इस ऐप को सुबह 10:00 बजे और शाम को 6:00 बजे अपडेट किया जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर से जाकर डाउनलोड किया जा सतकता है.

अरविंद केजरीवाल ने बताया कि 1031 हेल्पलाइन है उस पर फोन करेंगे तो आपको SMS के जरिए इसका लिंक भेज दिया जाएगा. या फिर आप 8800007722 पर व्हाट्सएप करके भी से डाउनलोड भी कर सकते हैं. दिल्ली CM ने बताया कि अगर अस्पताल ने आप को एडमिशन देने से मना किया तो आप 1031 पर अस्पताल के रिसेप्शन से कॉल करें. यह कॉल सीधा हमारे स्पेशल सेक्रेट्री हेल्थ के पास पहुंचेगा और वह अस्पताल से बात करके आपको बेड दिलाएंगे. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन अगर कोई अस्पताल जांच करके यह कहता है कि आपको एडमिट होने की जरूरत नहीं है, आप घर में क्वॉरेंटाइन हो सकते हैं तो उनकी बात मान लें और अगर आप गंभीर स्थिति में पहुंच जाते हैं तो आप अस्पताल में आ सकते हैं.

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