जानिए लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच का अंतर !

Image Source : Hina Khan 's instagram
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जानिए Lockdown और Curfew के बीच का अंतर !

कोरोना वायरस ने पूरे विश्व में तबाही मचाई हुई है। यह वायरस इतना घातक रूप ले चुका है की तेज़ी से लोगो को अपने संक्रमण का शिकार बनता जा रहा है। कोरोना वायरस के प्रकोप से बचने ले लिए विश्वभर में कई तरह के प्रयतन किये जा रहे है , लेकिन इसका कहर थमने का ले रहा है।

कोरोना वायरस से बचने और इसके संक्रमण को कम करने का एक मात्र उपाए अभी तक सामनेआया है वो है Lockdown या फिर Curfew, इस वक़्त कोरोना के प्रकोप के कारण सभी बड़े एवं विकसित देश भी इस बीमारी के आगे बेबस नज़र आरही है। जिसके बाद कई देशों ने इसकी रोकथाम के लिए मजबूरन अपने -अपने देशों में Lockdown या Curfew लागू कर दिया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को देश के नागरिकों से जनता कर्फ्यू की अपील की थी। लेकिन कोरोना संक्रमण को बढ़ता देख प्रधानमंत्री मोदी ने लॉक डाउन घोषित किया , जबकि कुछ राज्यो ने अपने यहां curfew को लागू कर दिया।

लॉकडाउन और कर्फ्यू

फ़िलहाल कोरोना के कारण सभी व्यक्ति अपने अपने घरों के अंदर रहने को मजबूर है ऐसे में हम सभी के मन में एक सवाल तो लाज़मी तोर से उठ रहा होगा की अखिर Lockdown और Curfew के बीच क्या अंतर है ? यह किस प्रस्थिति में लागु किया जाता है , तो आज हम आपको विस्तार से इस बारे में बताते है कि अखिर Lockdown और Curfew क्या होता है।

CURFEW : देश में Curfew किसी भी गंभीर परिस्थिति को देखते हुए लगाया जाता है , कर्फ्यू के दौरान किसी भी तरह की आवाजाही पर सम्पूर्ण तरह कि पाबन्दी होती है। यहाँ तक कि किसी व्यक्ति को अपने घर से आवश्यक काम के लिए भी बाहर नहीं निकल सकता, लोगों को सड़कों से दूर रखने के लिए प्रशासन द्वारा जारी कर्फ्यू एक सख्त आदेश होता है जिसे सभी व्यक्ति और संस्थाओं को मानना ही पड़ता है.

कर्फ्यू कुछ दिनों या घंटों के लिए किसी विशेष क्षेत्र में लगाया जाता है। आमतौर पर, कर्फ्यू; सांप्रदायिक दंगे, आतंकी घटना या किसी विकट आपदा के कारण लागू किया जाता है. कर्फ्यू के दौरान बाजार, स्कूल, कॉलेज इत्यादि संस्थाएं बंद रहतीं हैं और अन्य सेवाएं भी निलंबित रहतीं हैं।

यदि कोई व्यक्ति या संस्था इस आदेश का पालन नहीं करता तो उसपर सख्त करवाई के तहत उस पर पुलिस द्वारा जुर्माना या गिरफ्तार किया जा सकता है। कर्फ्यू के दौरान लोग कुछ घंटों के लिए घर के अंदर रहने को मजबूर होते हैं जैसे राशन या फिर किसी तरह के स्वास्थ संबधित उपचार के लिए , तब कुछ घंटे के लिए कर्फ्यू को हटाया जाता है, जिसे कर्फ्यू में ढील देना कहा जाता है।

Curfew के दौरान स्थानीय प्रशासन द्वारा जरूरी समान के लिए कुछ समय की छूट दी जाती है जो कि पूरी तरह प्रशासन पर निर्भर रहती हैं, ऐसी भी स्थिति सम्भव है की प्रशासन यह छूट न भी दे।

LOCKDOWN : lockdown एक आपातकाल जैसी प्रणाली है, जिसके तहत निजी और सरकारी कार्यालय (कुछ को छोड़कर), निजी प्रतिष्ठान और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से बंद हो जाते हैं. यह सरकार द्वारा अपनाई गई एक अस्थायी प्रणाली होती है।

लॉकडाउन Covid19

Lockdown शहर के जिला अधिकारी द्वारा लागू की जाती है , इसके पीछे का कारण एक आपातकाल स्थिति के दौरान लॉक डाउन का फैसला लिया जाता है जाता है। जिसके तहत निजी और सरकारी कार्यालय (कुछ को छोड़कर), निजी प्रतिष्ठान और सार्वजनिक परिवहन पूरी तरह से बंद हो जाते हैं. यह सरकार द्वारा अपनाई गई एक अस्थायी प्रणाली होती है। जैसे अभी देश में सम्पूर्ण लॉक डाउन जारी है , इसका मूल उद्देश्य, किसी भी घातक बीमारी आदि के प्रकोप को

फैलने से रोकने के लिए लोगों के बीच व्यक्तिगत संपर्क को कम करना होता है, जैसे अभी देश में कोरोना वायरस के प्रकोप कम करने के लिए सम्पूर्ण लॉक डाउन जारी है, लॉक डाउन के दौरान आम जनता को जरूरी सुविधाएं प्रदान करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होती हैं।

लॉकडाउन और कर्फ्यू के बीच का अंतर

पाबन्दी – कर्फ्यू के दौरान, सभी आवश्यक सेवाएं और बाजार एक अवधि के लिए बंद रहते हैं लेकिन लॉकडाउन में आवश्यक सेवाएं और जरूरी बाजार/दुकानें बंद नहीं होते हैं, लॉकडाउन के दौरान; बैंक, एटीएम, गैस एजेंसी, डाकघर, फायर ऑफिस, अस्पताल, मेडिकल स्टोर, दूध बूथ आदि जैसी आवश्यक सेवाएं आम जनता के लिए खुली रहती हैं.

अवधि – कर्फ्यू को किसी विशेष क्षेत्र में कुछ विशेष घंटों की निर्धारित संख्या के लिए लगाया जाता है, लेकिन लॉकडाउन आमतौर पर अधिक लंबी अवधि के लिए किया जाता है.

कारण – देश में कर्फ्यू किसी सांप्रदायिक दंगे, आतंकी घटना के माहौल को देखते हुए लगाया जाता है लेकिन लॉकडाउन को किसी विशेष परिस्थिति जैसे किसी बीमारी के फैलाव के कारण लगाया जाता है जैसे कि अभी COVID-19 के कारण 21 दिनों के लिए पूरे देश में लॉकडाउन घोषित किया गया है.

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