Home Breaking News Hindi सचिन, सहवाग और गांगुली भी नहीं कर पाए मोहम्मद कैफ की बराबरी

सचिन, सहवाग और गांगुली भी नहीं कर पाए मोहम्मद कैफ की बराबरी

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जब बात लॉर्ड्स क्रिकेट ग्राऊंड की हो और नेटवेस्ट ट्रॉफी याद आए, तो कोई मोहम्मद कैफ की बात किए बिना कैसे रह सकता है। कैफ की बेहतरीन बल्लेबाजी के कारण ही 2002 के नेटवेस्ट ट्रॉफी फाइनल में सौरभ गांगुली ने अपनी ब्लू जर्सी हवा में लहराई थी और 1984 के बाद एक बार फिर तिरंगा लॉर्ड्स में विजय ध्वज के रूप में लहराया था। विकेट के बीच कैफ की रफ्तार, गोली की तरह तेज थ्रो और विकेट पर सटीक निशाना आज भी हमें मोहम्मद कैफ की याद दिलाती है। 2002 में इंडियन एक दिवसीय टीम को ना केवल एक अच्छा बेट्समैन मिला बल्कि एक ऐसा फिल्डर मिल गया जो फिल्डिंग से भी 20-30 रन बचा लेता था। फिल्डिंग में तो सचिन, सहवाग और सौरभ भी कभी नहीं कर पाए कैफ की बराबरी। अपनी बैटिंग से ही नहीं बल्कि फिल्डिंग से भी मैच जिताने वाले हरफनमौला क्रिकेटर मोहम्मद कैफ के बारे में बात करेंगे- जानेंगे राजनीति में उनके पदारपन और उनके कट्टरता विरोधी ट्वीट के बारे में-

करियर

इलाहाबाद, उत्तर-प्रदेश में 1 दिसंबर 1980 को जन्मे मोहम्मद कैफ ने 2000 में अंडर 19 भारतीय टीम को कैप्टन के रूप में वर्ल्डकप जिताया, बड़ी बात ये थी कि उस वर्ल्डकप में भारतीय टीम कैफ की अगुआई में एक भी मैच नहीं हारी। 2002 में साऊथ अफ्रिका के विरूध टेस्ट टीम में पहली बार कैफ को भारत के नेशनल टीम में जगह मिली और 2002 में उन्हें पहली बार कानपुर के ग्रीन पार्क मैदान में इंग्लैंड के विरूद्ध एकदिवसीय मैच खेलने का मौका मिला। 2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी में 87 रनों की पारी भला कौन भूल सकता है, जहां युवराज सिंह के आउट होने के बाद जहीर खान के साथ मिलकर टीम इंडिया को जीत दिलाई। कैफ ने कुल 13 टेस्ट मैच में 32.84 की औसत से 624 रन और 125 एकदिवसीय मैच में 32.01 की औसत से 2753 रन बनाया है। इसके आलावा उन्होंने टी-ट्वेंटी, और कल्ब के मैंचों में भी अच्छा प्रदर्शन किया है। उत्तर-प्रदेश के अलावा कैफ आंधप्रदेश और छत्तीसगढ़ के भी कप्तान रह चुके हैं और वर्तमान में वो गुजारात लॉयन्स के असिस्टेंट कोच हैं। आईपीएल में राजस्थान रॉयल्स और किंग्स इलेवन पंजाब की तरफ से भी खेल चुके हैं।

संघर्ष

भले ही 2000 में अंडर 19 जीतने के बाद वो टेस्ट टीम में शामिल कर लिए गए लेकिन वहां अच्छा नहीं कर पाने के कारण उन्हें टीम में जगह नहीं मिली। हालांकि 2002 में एकदिवसीय टीम में शामिल होने के बाद वो लगातार खेलते रहे, पर टेस्ट टीम में फिर से उन्हें 2004 में जाकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मौका मिला जहां उन्होंने दो अर्द्धशतक बनाया। 2005 में एक बार फिर बाहर होने के बाद उनको 2006 में युवराज के घायल होने पर टेस्ट टीम में इंग्लैंड के खिलाफ मौका मिला और उन्होंने वहां 91 रन की बेहतरीन पारी खेली पर युवराज के फिट हो जाने के बाद उन्हें आगे मौका नहीं दिया गया। इसी दौरान वेस्टइंडीज के खिलाफ कैफ को तेंदुलकर के घायल होने पर एक बार फिर से मौका दिया गया, जहां उन्होंने आपना पहला और एकमात्र टेस्ट शतक 148 रन की नॉटआऊट पारी खेली। कैफ ने अपने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट का अंतिम एकदिवसीय 2006 में और अंतिम टेस्ट मैच 2008 में खेला।

बेहतरीन प्रदर्शन

2000 में अंडर 19 टीम के कप्तान के रूप में भारत को वर्ल्डकप का विजेता बनाया।

2002 में नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ ‘मैन ऑफ द मैच।’

2004 में बांग्लादेश के खिलाफ चैलेंजर ट्रॉफी में ‘मैन ऑफ द सीरीज।’

राजनीति

क्रिकेट के साथ-साथ कैफ ने राजनीति में भी हाथ आजमाया। 2014 के लोकसभा चुनाव में वो उत्तर-प्रदेश के फुलपुर लोकसभा क्षेत्र से लड़े, जहां वह बीजेपी उम्मीदवार केशव प्रसाद मौर्य से पराजित हुए। क्रिकेट के पिच पर हिट रहने वाले कैफ राजनैतिक पिच पर फ्लॉप साबित हुए और फिर से क्रिकेट की ओर लौट गए।

कट्टरता का विरोध

हाल-फिलहाल में वर्तमान भारतीय टीम के सदस्य मो. समी को जब सोशल मीडिया पर एक फोटो को लेकर धर्म विशेष के लोगों ने टारगेट किया तो वो खुलकर समी के पक्ष में खड़े रहे और धर्म के ठेकेदारों का विरोध किया। वहीं कुछ दिन पहले जब कैफ ने पाकिस्तान के जेल में कैद भारत के कुलभूषण जाधव के मामले में अपने देश का समर्थन किया तो एक पाकिस्तानी लड़के ने ट्वीट करते हुए कहा कि तुम्हें अपने नाम से मोहम्मद हटा लेना चाहिए तो कैफ ने उस पाकिस्तानी लड़के को ट्वीटर पर आढे हाथों लिया। कैफ ने उस वक्त ट्वीट कर भारत को दुनिया का सबसे सहनशील देश बताया था।

कैफ के बारे में अनसुनी बातें

2003 वर्ल्डकप के दौरान उन्होंने श्रीलंका को विरूद्ध खेलते हुए एक मैच में 4 कैच पकड़ा है जो कि एक विश्वरिकार्ड है।

कैफ ने एक इंटरव्यू में अपने बैट पकड़ने की शैली को गलत बताया था, वो एक हाथ से बैट का ग्रीप काफी ऊपर पकड़ते हैं तो एक हाथ से काफी नीचे जो कि गलत माना जाता है। इसका कारण उन्होंने शुरूआती दौर में अच्छे कोच नहीं मिलने को बताया था।

अमूमन सीधे-साधे दिखने वाले कैफ ने 2005 में कोलकाता के इडेन गार्डेन में पाकिस्तान के विरूद्ध दूसरे टेस्ट में खेलते हुए यूसुफ योहाना को बोरिंग प्लेयर कहा था, वहीं जब अब्दुल रज्जाक खेलने आया और वह काफी शांत होकर खेल रहा था तो कैफ ने उन्हें छेड़ते हुए कहा, “बॉलिंग के वक्त तो तू बहुत बोलता है अब क्या हो गया तुझे।”

पूरे सफर को देखते हुए कैफ के करियर को महान तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इतना कहना जरूरी होगा कि उन्होंने अपने खेल से भारतीय दर्शकों दिल जरूर जीता है।

 

 

 

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