जानें पहले जज के बारे में जिसने J&K संविधान की जगह भारतीय संविधान की शपथ ली

रजनीश ओसवाल
रजनीश ओसवाल
जानें पहले जज के बारे में जिसने J&K संविधान की जगह भारतीय संविधान की शपथ ली

जम्मू-कश्मीर के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि J&K हाई कोर्ट में नियुक्त किसी जज ने भारतीय संविधान की शपथ ली हो. रजनीश ओसवाल को हाई कोर्ट के मुख्य न्यायधीश गीता मित्तल ने शपथ दिलवाई. आपको बता दें, इससे पहले J&K हाई कोर्ट में जब भी किसी जज की नियुक्ति होती थी, तो उसको जम्मू-कश्मीर के संविधान की शपथ दिलाई जाती थी.

रजनीश ओसवाल की नियुक्ति की अधिसूचना 20 जनवरी,2020 को जारी की गई. 2019 में मोदी सरकार द्वारा जम्मू और कश्मीर में धारा 370 हटाने से पहले यह एक राज्य था. उसके बाद जम्मू और कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया.

इसके बाद 11 अगस्त 2018 को न्यायमूर्ति गीता मित्तल ने जम्मू एवं कश्मीर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी. हालांकि उन्होंने J&K संविधान की शपथ ली थी. 

इसके बाद रजनीश ओसवाल की नियुक्ति की नियुक्ति हुई और उन्होने भारतीय संविधान की शपथ ली. इसके साथ ही कोरोना के चलते पहली बार हाईकोर्ट के एक जज के शपथग्रहण का सीधा प्रसारण हुआ. इसका वेबलिंक के माध्यम से सीधा प्रसारण किया गया, क्योंकि शपथ के समय लोग नहीं जा पाए.

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रजनीश ओसवाल का जन्म जम्मू में 17 जून , 1973 को हुआ. इन्होनें डीबीएन स्कूल मुबारक मडी से अपनी प्राथमिक शिक्षा हासिल की. इससे पहले जो जम्मू और कश्मीर के इतिहास में कभी ऐसा नहीं हुआ कि किसी जज ने भारतीय संविधान की शपथ ली हो. आपको बता दें जम्मू और कश्मीर को संविधान राज्य सरकार द्वारा बनाया गया था.

जम्मू और कश्मीर का संविधान 17 नवंबर , 1956 को अपनाया गया था तथा यह 26 जनवरी 1957 को लागू हुआ था. इसके बाद 5 अगस्त , 2019 से जम्मू और कश्मीर से धारा 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख दो केंद्र शासित प्रदेश बना दिए.

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