गुजरात: 2002 गोधरा रेल अग्नि कांड में विशेष कोर्ट ने दो को सुनाई उम्रकैद की सज़ा, तीन बरी

गुजरात में हुए 2002 के गोधरा रेल अग्नि काण्ड में स्पेशल कोर्ट का फैसले आ गया है. इस फैसले में जहा दो आरोपियों को उम्रकेद की सजा सुनाई गई है वही तीन आरोपियों को बरी कर दिया गया है. इस मामले में कोर्ट ने पांच लोगों पर फैसला सुनाया है. हुसैन सुलेमान, कसम भेमेडी, फारूक धतिया, फारूक भाना, इमरान उर्फ़ शेरू भटुक के खिलाफ सुनवाई हो रही थी. साल 2002 गोधरा कांड मामले में 6 आरोपियों में से एक अब्दुलगनी पाटड़िया की 20 अगस्त 2017 में ट्रायल के दौरान मौत हो चुकी है.

क्या था 2002 रेल अग्नि कांड मामला ?

2002, 27 फरवरी की सुबह जैसे ही साबरमती एक्सप्रेस गोधरा रेलवे स्टेशन के पास पहुंची, उसके एक कोच से आग की लपटें उठने लगीं और धुएं का गुबार निकलने लगा. साबरमती ट्रेन के S-6 कोच के अंदर भीषण आग लगी थी. जिससे कोच में मौजूद यात्री उसकी चपेट में आ गए थे. इनमें से ज्यादातर वो कारसेवक थे, जो राम मंदिर आंदोलन के तहत अयोध्या में एक कार्यक्रम से लौट रहे थे. आग से झुलसकर 59 कारसेवकों की मौत हो गई थी. जिसने इस घटना को बड़ा राजनीतिक रूप दे दिया और गुजरात के माथे पर एक अमिट दाग लगा दिया था.

पहले भी हो चुकी है आरोपियों को सज़ा

एसआईटी की विशेष अदालत ने एक मार्च 2011 को इस मामले में 31 लोगों को दोषी करार दिया था जबकि 63 को बरी कर दिया था. इनमें 11 दोषियों को मौत की सजा सुनाई गई थी जबकि 20 को उम्रकैद की सजा हुई थी. बाद में उच्च न्यायालय में कई अपील दायर कर दोषसिद्धी को चुनौती दी गई जबकि राज्य सरकार ने 63 लोगों को बरी किए जाने को चुनौती दी थी.

बता दे गोधरा रेल अग्निकांड के बाद गुजरात में भयंकर दंगे हुए थे जिसमे एक हज़ार से लोगों की जान चली गई थी.  उस समय प्रदेश के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी थे.