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आजतक कितनी ऐसी फिल्में हैं जिसमें लोकप्रियता और प्रसिद्धि पाने के लिए भारतीय इतिहास से छेड़छाड़ की

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फिल्म और इतिहास
फिल्म और इतिहास

किसी भी समाज के लिए उसके इतिहास का विशेष महत्व है. इतिहास किसी भी देश के गौरवशाली अतीत का आइना होता है. जिसको बहुत गंभीरता से लेना चाहिए. ताकि समाज के सामने वास्तविक इतिहास को दिखाया जा सके. आजकल इतिहास पर फिल्म बनाने का चलन शुरू हुआ है. इतिहास पर फिल्म बनाने में कोई बुराई नहीं है. लेकिन फिल्म बनाने वालों पर लगातार आरोप लगते रहें हैं, कि वो फिल्मों को रोचक बनाने के लिए काफी बार इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर देते हैं. इसका उद्देश्य लोकप्रियता और प्रसिद्धि पाना होता है. इसका बड़े स्तर पर विरोध भी किया जाता है.

अशोका फिल्म

1960 में के. आसिफ की फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ बनाई. जिसमें सलीम (जहांगीर) और अनारकली के प्रेम संबंधों पर बनी इस फिल्म ने सफलता का सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. हकीकत में इतिहास में अनारकली नाम की कोई महिला थी ही नहीं. यह निर्माता-निर्देशक की कोरी कल्पना थी. फिल्म में इतिहास के साथ खासी छेड़छाड़ की गई, उसे तोड़ा मरोड़ा गया था. मगर फिल्म की सफलता ने फिल्म निर्माताओं को इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने को प्रोत्साहित किया.

मंगल पांड़े

‘मुगल-ए-आजम’ के बाद 1966 में सुनील दत्त और वैजयंतीमाला की ‘आम्रपाली’, शाहरुख खान और करीना कपूर की ‘अशोका’, आमिर खान की ‘मंगल पांडे’, ऋतिक रोशन और ऐश्वर्या राय की ‘जोधा अकबर’ आदि ऐसी ही फिल्में हैं. जिन्होंने इतिहास को अपने-अपने तरीके से तोड़ मरोड़ कर पेश किया गया. ऐसे आरोप लगते रहे हैं. इन सबके पीछे वहीं कारण दिए जाते हैं कि फिल्म एक अलग माध्यम है, इसमें आवश्यक बदलाव किया जाना जरूरी है. अभिव्यक्ति की स्वंत्रता के नाम पर फिल्म में मनोरंजक तत्त्व डाले गए.

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अगर हम नजर डालें तो ऐसे अनेंक धारावाहीक भी आते हैं. जिसमें कहीं ना कहीं इतिहास से छेड़छाड़ की गई है. पदमावत नाम से एक फिल्म आई थी. जिसके विरोध में बड़े स्तर पर हिंसात्मक विरोध प्रदर्शन भी किया गया. लेकिन इतिहास के साथ छेड़छाड़ करने का हक किसी को नहीं मिलना चाहिए. इतिहास हमारे लिए हमारी बहुत बड़ी विरासत है.