भारत के इतिहास में जातियां कैसे बनी ?

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जाति भारत का इतिहास
जाति भारत का इतिहास

भारत के इतिहास में जातियां कैसे बनी ? ( How were castes formed in the history of India? )

भारत को अनेंकता में एकता वाला देश भी कहा जाता है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि यहां विभिन्न धर्म और जातियों के लोग मिल झुलकर रहते हैं. कभी कभी धर्म और जातियों में संघर्ष भी देखने को मिलता है. जिसके पीछे कहीं ना कहीं राजनीति कारण ही ज्यादा होता है. लोगों के मन में इस तरह का सवाल पैदा होना आम बात है कि आखिरकार ये जातियां भारत में कैसे बनी तथा भारत में जातियों का इतिहास क्या है. इस पोस्ट में भारत के इतिहास के इसी महत्वपूर्ण विषय को जानते हैं कि कैसे भारत के इतिहास में जातियां बनी.

वैदिक काल

प्राचीन भारत के इतिहास में वर्ण व्यवस्था-

प्राचीन भारत के इतिहास में यदि ऋग्वेदिक काल की बात करें, तो उस समय समाज को वर्णों में विभाजित किया गया था. लेकिन ऐसा सिर्फ और सिर्फ काम के आधार पर था. यह जन्म पर आधारित नहीं था. ऋग्वेद के दसवें मंडल में चार वर्णों का हमें पहली बार प्रय़ोग मिलता है. इसके बाद उत्तरवैदिक काल में वर्ण व्यवस्था कार्य पर आधारित ना होकर जन्म पर आधारित होने लगी. जिसके कारण धीरे धीरे वर्ण व्यवस्था कठोर होती गई. इससे पहले कोई भी कार्य को बदलकर दूसरे वर्ण में शामिल हो सकता था. लेकिन उत्तरवैदिक काल में जन्म ही निर्धारित करता था कि कौन व्यक्ति किस वर्ण से संबंध रखेगा.

वर्ण व्यवस्था

वर्ण व्यवस्था और जाति व्यवस्था का संबंध-

वर्ण व्यवस्था के कठोर हो जाने के बाद निर्धारित किया गया था कि कोई व्यक्ति अपनी नीची जाति में शादी नहीं कर सकता था. लेकिन उस समय भी प्रेम विवाह ( गंधर्व विवाह ) होते थे. जिसमें पुरूष उंची जाति से संबंध रखता या महिला. इस तरह के विवाह के बाद उनसे उत्पन्न होने वाली संतान का भी एक नया वर्ग तैयार हुआ. जहां से जाति व्यवस्था का आरंभ बताया जाता है.

जाति व्यवस्था

मध्यकालिन भारत से जाति व्यवस्था की शुरूआत-

कुछ लोगों का ऐसा भी मत है कि जाति व्यवस्था की शुरूआत मध्यकालिन भारत से हुई थी. इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि जब मुस्लिम धर्म के आक्रमणकारियों ने भारत पर आक्रमण किया. उस समय भारत में हिंदू धर्म के लोगों की संख्या ज्यादा थी. इसके कारण उनको विभाजित करने के लिए जाति व्यवस्था की शुरूआत मुस्लिम शासको के द्वारा की गई थी. हालांकि इस तरह के विचार सांप्रदायिक लेखन के अंतर्गत आते हैं.

वर्ण व्यवस्था

अमेरिका के प्रतिष्ठित विज्ञान जर्नल ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ़ द नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइन्सेज़’ (Proceedings of the National Academy of Sciences) में एक दिलचस्प वैज्ञानिक अध्ययन आया है. यह अध्य्यन पश्चिम बंगाल के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ बॉयोमेडिकल जेनॉमिक्स (National Institute of Biomedical Genomics) के विज्ञानियों पार्थ पी. मजूमदार (Partha P. Majumdar) अनल आभा बसु (Analabha Basu) और नीता सरकार-रॉय (Neeta Sarkar-Roy) की टीम ने किया है. उन्होंने विभिन्न राज्यों से लिये 18 जाति समूहों के नमूने लेकर भारतीय आबादी के जेनॉम अध्ययन के बाद पाया है कि भारत में जातिगत समाज का जन्म आज से क़रीब सत्तर पीढ़ियों पहले या 1575 साल पहले हिन्दू गुप्त वंश के साम्राज्य में हुआ और यह काल सन् 319-550 (चौथी से छठी शताब्दी) के बीच चन्द्रगुप्त द्वितीय या कुमारगुप्त प्रथम के समय का माना जा सकता है.

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