ऑडिट में JNU के खर्च में 57 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला आया सामने

ऑडिट में JNU के खर्च में 57 लाख रुपये की धोखाधड़ी का मामला आया सामने

वित्त वर्ष 2017-18 का है मामला

नई दिल्ली:

एक केंद्रीय व्यय लेखा परीक्षा टीम ने वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के 100 से अधिक अधिकारियों के अवकाश यात्रा भत्ता और फोन बिल के भुगतान में 57 लाख रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का पता लगाया है. फर्जी यात्रा बिल या अन्य अनधिकृत बिलों के आधार पर की गई कथित धोखाधड़ी पर लेखापरीक्षा महानिदेशक (केंद्रीय व्यय) के कार्यालय द्वारा जवाब मांगे जाने पर जेएनयू ने इस मामले में जांच शुरू की है. जेएनयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने का अनुरोध करते हुए कहा, ‘‘इस मामले को विश्वविद्यालय के कार्यकारी परिषद की बैठक में चर्चा के लिए रखा गया. परिषद को इस मामले से अवगत कराया गया है और इसकी जांच की जा रही है. परिषद के फैसले के अनुसार, फर्जीवाड़ा करने वालों को भुगतान के लिए कहा जाएगा.”

इसके ऑडिट के बाद, डीजीएसीई ने कथित धोखाधड़ी करने वाले, विश्वविद्यालय के कर्मचारियों को निलंबित करने और उनके खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की थी. यह मामला इस साल फरवरी में तब उजागर हुआ, जब कोटा के आरटीआई कार्यकर्ता सुजीत स्वामी द्वारा दायर आरटीआई के जवाब में डीजीएसीई ने इसका खुलासा किया. सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत दायर किए गए आवेदन में नयी दिल्ली के जेएनयू और जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय का वित्त वर्ष 2017-18, 2018- 19 और 2019-20 का पूरा ऑडिट और निरीक्षण रिपोर्ट का विवरण मांगा गया था.

आरटीआई के तहत दायर आवदेन के जवाब में, डीजीएसीई ने स्वामी को वर्ष 2017-18 के लिए दोनों केंद्रीय विश्वविद्यालयों के खर्चों के किए गए ऑडिट की रिपोर्ट दी , लेकिन साथ ही कहा कि 2018-19 और 2019-20 की ऑडिट रिपोर्ट अभी तैयार नहीं हुई है.

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