पढ़ाई से जुड़ी दुनिया में कुछ चीज़ें हमें चौंका सकती हैं, क्या ऐसा भी होता है?

स्कूल और शिक्षा बच्चों के लिए उबाऊ हो सकती है। ऐसा उन्हें लगता है लेकिन यही बच्चे जब बड़े होते हैं तो उन्हें शिक्षा की कीमत पता चलती है और उन्हें उसी की याद आती है जिस स्कूल में उन्हें जाने का मन नहीं करता है। जब कभी भी युवा अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी नहीं पाता है या उसकी जीवन शैली उतनी अच्छी नहीं होती जितनी वह पढ़ाई करते हुए सोच रखी होती है तो वही युवा अपनी शिक्षा व्यवस्था को कोसता है। क्या आप जानते हैं दुनिया में शिक्षा से जुड़ी कई अद्भुत चीज़े हैं चाहे वह स्कूल हो या छात्रों की बुद्धिमत्ता। ये सभी चीज़े एक औसत बालक और सामान्य आदमी को चौका सकती हैं। आइये हम आपको स्कूल से जुडी ऐसी ही कुछ चीज़े बताते हैं –

1- भारत में लखनऊ स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, छात्रों की संख्या के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा स्कूल है। इसमें 32,000 से ज्यादा छात्र हैं।

2- चीन में छात्रों को दुनिया में सबसे अधिक होमवर्क मिलता है। एक सप्ताह में औसतन एक छात्र 14 घंटे का होमवर्क करता हैं।

3- पाकिस्तान एक ऐसा देश है जो बच्चों को मुफ्त शिक्षा का कानूनी अधिकार नहीं देता है। वहाँ केवल 5 और 9 वर्ष की आयु के बच्चे अनिवार्य शिक्षा के हकदार हैं।

4- चिली में ग्रीष्मकालीन छुट्टियां दिसंबर के मध्य से शुरू होती हैं और मार्च की शुरुआत में समाप्त होती हैं। वहाँ स्कूल से पूरे 3 महीने बंद रहते है।

5- फ्रांस में अगस्त से जून तक का सबसे छोटा शैक्षिक सत्र होता है। इसीलिए अगला सत्र सबसे लम्बा होता है।

6- जर्मनी में बच्चों को एक विशेष कोन दिया जाता है जिसे ‘स्कुलुट’ कहा जाता है, जो पेन, पेंसिल, किताबें और स्नैक्स से भरा होता है।

7- हॉलैंड में बच्चे उस दिन स्कूल जाना शुरू करते हैं जिस दिन वे 4 वर्ष के होते हैं, जिसका अर्थ है कि कक्षा में हमेशा कोई न कोई नया होता है।

8- दुनिया का सबसे पुराना स्कूल कैंटरबरी, इंग्लैंड में है। इसका नाम किंग्स स्कूल है। इसे 597 ईस्वी में स्थापित किया गया था।

9- ईरान एक ऐसा देश है जहाँ लड़कियों और लड़कों को कॉलेज पहुँचने तक अलग से शिक्षित किया जाता है। वहाँ लड़के और लड़कियाँ कॉलेज में पहुंचने से पहले एक क्लास में नहीं पढ़ते हैं।

10- ब्राजील में परिवार के साथ भोजन करना संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, यही वजह है कि स्कूल सुबह 7 बजे शुरू होते हैं और दोपहर तक खत्म हो जाते हैं ताकि बच्चे अपने माता-पिता के साथ दोपहर का भोजन कर सकें।