रोचक तथ्य : इतिहास में जब जानवरों को सुनाई फांसी तथा अन्य सजा

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हाथी को फांसी
हाथी को फांसी

कानून व्यवस्था किसी भी देश को सही तरीके से चलाने के लिए आवश्यक होती है. कोई व्यक्ति दोषी है या नहीं और अगर कोई व्यक्ति दोषी है, तो उसके लिए क्या सजा होनी चाहिएं इसके लिए कोर्ट बनाए गए हैं. जिनमें मुकदमा चलता है तथा दोषी पाए जाने पर सजा सुना दी जाती है. लेकिन यदि आपको पता चले की कोर्ट ने किसी जानवर को सजा सुनाई वो भी फांसी जैसी सजा तो आपको विश्वास नहीं होगा. लेकिन आपको बता दे इतिहास के पन्नों में कुछ ऐसी भी घटनाएं दर्ज हैं, जब जानवरों को सजा के तौर पर फांसी दी गई हो.

मुर्गा

1906 में लंदन के डब्ल्यू हेनमन (W.Heinemann) प्रकाशन ने एक पुस्तक प्रकाशित की थी जिसका नाम था The Criminal Prosecution and Capital Punishment of Animals. इस पुस्तक में कुछ घटनाएं बताई गई हैं, जब जानवरों को सजा सुनाई गई थी.    

सुअर

चौकानें वाली घटना सितंबर 1916 में अमेरिका के टेनेसी राज्य में घटित हुई जब एक हाथी को फांसी दे दी गई. इस हाथी का नाम मैरी था. इस हाथी के उपर आरोप था कि उसके ट्रेनर की सर्कस के दौरान उसने हत्या कर दी थी. जिसके बाद उस हाथी पर मुकदमा चलाया गया तथा उसको दोषी मानते हुए उसको फांसी की सजा दे दी गई.

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इसी किताब में लिखी घटना के अनुसार यह बात 1474 ई. की है. जब एक मुर्गे ने अंड़ा दे दिया. जिसके बाद उसपर मुकदमा चलाया गया तथा उसको अप्राकृतिक अपराध का दोषी पाया गया. इसके बाद उसको जिंदा जलाने की सजा सुनाई गई. इस किताब के अनुसार सुअर पर भी केस दर्ज किया गया तथा जिसको फांसी की सजा सुनाई गई. ऐसा ही मुकदमा एक चूहे पर भी किया गया. लेकिन चूहे को सजा की जगह बरी कर दिया गया था.