कर्ज सस्ता होने का हुआ एलान ।

रिजर्व बैंक ने बुधवार को उम्मीदों के मुताबिक़ नीतिगत ब्याज दर में 0.25 फीसदी कटौती का ऐलान किया। इससे पर्सनल, आवास एवं वाहन ऋण के सस्ते होने की उम्मीद बढ़ गयी है। आरबीआई की छह सदस्यीय समिति ने मौद्रिक नीति समीक्षा के दूसरे दिन रेपो रेट 6.25 से घटाकर 6 प्रतिशत करने की घोषणा की।

अक्टूबर 2016 के बाद पहली बार ब्याज दर में कमी की गयी है और यह सितंबर 2010 के बाद से सबसे कम रेपो रेट है। रेपो रेट वह दर है, जिस पर रिजर्व बैंक अन्य बैंको को कर्ज मुहैया कराता है। रिजर्व बैंक ने रिवर्स रेपो रेट को छह से घटाकर 5.75 प्रतिशत कर दिया और कैश रिजर्व राशियों को 4% पर बरकरार रखा। आर्थिक मामलो के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि ब्याज दर में कटौती का स्वागत किया।

बड़ी कंपनियों के फसें कर्ज पर चिंता जताई
आरबीआई गवर्नर ने 2017-18 के लिए आर्थिक विकास दर के अनुमान को 7.3 प्रतिशत पर बरकरार रखा, लेकिन बड़ी कंपनियों के फंसें कर्ज पर चिंता जताई। पटेल ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक जोखिम में फंसें बड़ी कंपनियों के कर्ज को सुलझाने और सरकारी बैंको को पूँजी उपलब्ध कराने पर मिलकर काम कर रहे है।

ईएमआई कम होगी
रिजर्व बैंक के फैसले के हिसाब से बैंक ब्याज दर 0.25 फीसदी घटाते है तो होम लोन की ईएमआई में कमी आएगी। इससे 20 लाख के होम लोन पर सालाना करीब चार हजार रूपये बचत हो सकती है।

कर्ज सस्ता न करने पर फटकार
आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल ने नीतिगत ब्याज दरों में पहले की गई कटौती का फायदा आम जनता को न देने पर बैंको को आड़े हाथो लिया । बुधवार को रेपो रेट में 0.25 फीसदी कटौती की घोषणा के दौरान पटेल ने कहा कि बैंको ने कटौती का पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं दिया है और ऋण पर ब्याज घटाने का अभी भी उनके पास अवसर है।

पटेल के इस ब्यान से बैंको पर आवास, पर्सनल और ऑटो लोन सस्ता करने का दबाव बढ़ेगा। बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर ने कहा कि नीतिगत दरों में कटौती के बाद बैंको ने कर्ज की दरों में मामूली कटौती की और पूरा लाभ ग्राहकों को नहीं दिया।