मद्रास हाई कोर्ट ने स्कूल के बच्चों के लिए उठाया बड़ा कदम, अब बच्चे नहीं उठायेंगे बैग का बोझ

नई दिल्‍ली: मद्रास हाईकोर्ट ने बीते रात एक महत्वपूर्ण आदेश पर केंद्र सरकार से कहा है कि वह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश को निर्देश दें कि कोई भी स्कूल चाहें वो शैक्षणिक बोर्ड से संबद्ध रखते हो या नहीं, कक्षा पहली और दूसरों के छात्रों को नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (एनसीईआरटी) के सिफारिशों के अनुरूप ही होमवर्क दें.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जस्टिस एन किरुबाकरन ने अपने आदेश में कहा कि किसी भी स्कूल के पहली और दूसरी क्लास के छात्र पर भाषा और गणित के अलावा किसी अन्य विषय लेने पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव नहीं डालें. वहीं उन्होनें आगे बताया कि कक्षा तीसरी और पांचवीं के स्टूडेंट के लिए एकमात्र अतिरिक्त विषय पर्यावरण विज्ञान होना चाहिए.

न्‍यायालय ने केंद्र को फ्लाइंग स्‍कवॉड गठित करने का आदेश दिया

आपको बता  दें कि वहीं न्‍यायालय द्वारा केंद्र को आदेश दिया गया है कि राज्य सरकार और केंद्र शासित राज्‍यों में फ्लाइंग स्‍कवॉड को जल्द से जल्द गठित किए जाएं, ताकी हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश का सही तरीके से पालन हो रहा या नहीं इसका स्‍कूलों में जाकर निरीक्षण किया जाएं.

न्यायमूर्ति किरुबाकरन ने कहा कि ना तो बच्चे वेटलिफ्टर्स हैं और ना ही स्कूल बैग लोड कंटेनर हैं. उन्‍होंने यह बात बच्चों के स्कूल बैग के भारी वजन को लेकर कही है. अब देखना यह होगा कि मद्रास हाईकोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को स्कूलों के प्रशासन सुचारू रूप से अमल में लाया जाएगा, या फिर इस मामले पर भी  स्कूल प्रशासन द्वारा ढील दी जाएगी.