नीरव मोदी को भारत के कानून पर शक, रखी देश वापसी की शर्त

पीएनबी घोटाले के आरोपी नीरव मोदी को डर है कि भारत लौटने पर उसके खिलाफ सही से कानूनी सुनवाई नहीं होगी. नीरव के वकील विजय अग्रवाल का कहना है कि अगर अभियोजन पक्ष की ओर से निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया जाए तो उनका मुवक्किल भारत लौटने पर विचार कर सकता है.

साढ़े 11 हजार करोड़ रूपये से अधिक का पीएनबी को चूना लगाने वाले नीरव मोदी के वकील विजय अग्रवाल का कहना है कि अगर अभियोजन पक्ष की ओर से निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया जाए तो उनका मुवक्किल भारत लौटने पर विचार कर सकता है. अग्रवाल ने कहा,’यहां माहौल अनुकूल नहीं है, नीरव मोदी को सुनवाई से पहले ही दोषी करार दे दिया गया है. अगर हमें ऐसा लगता है कि मीडिया ट्रायल के बगैर निष्पक्ष जांच होगी तो नीरव मोदी के लौटने की उम्मीद कर सकते हैं.’

फ़िलहाल प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई फिलहाल देश भर में नीरव मोदी के ठिकानों पर छापेमारी कर संपत्तियों को सीज करने में जुटी हुई हैं. वकील विजय अग्रवाल का कहना है कि अगर नीरव की विदेश भागने की पहले से योजना होती तो वह इतनी बड़ी मात्रा में संपत्ति छोड़कर न जाते. सीबीआई के केस के जवाब में हम बचाव करेंगे.

कानूनी जानकारों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति विदेश भाग जाता है तो उसे वापस लेने के दो उपाय होते हैं. पहला प्रत्यर्पण या फिर निर्वासन. किसी व्यक्ति के प्रत्यर्पण के लिए दो देशों के बीच द्विपक्षीय संधि की जरूरत होती है.

अगर संधि नहीं होती तो फिर निर्वासन का मामला बनता है. निर्वासन के लिए भारत को वकील नियुक्त करना पड़ेगा, जो विदेशी कोर्ट में मुकदमा लड़ेगा. तब जाकर किसी व्यक्ति को भारत लाया जा सकता है. कानूनी जानकारों का मानना है कि पहले तो नीरव मोदी के खिलाफ पूरे मामले से संबंधित देश को अवगत कराना होगा, फिर देश से मदद मांगकर उसे वापस लेने की कार्रवाई करनी होगी. अगर संबंधित देश के साथ प्रत्यर्पण संधि है तो किसी व्यक्ति को वापस लाना बहुत मुश्किल नहीं है.

बता दें कि 2002 और दिसंबर 2016 के बीच जर्मनी, संयुक्त अरब अमीरात, एच और पेरू आदि देशों ने कुल 62 भगोड़ों का प्रत्यर्पण किया. इसकी सूचना विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर दर्ज है.