B’day Special: ‘महाभारत’ में ‘श्रीकृष्ण’ बनने से पहले ये काम किया करते थे Nitish Bharadwaj

B’day Special: ‘महाभारत’ में ‘श्रीकृष्ण’ बनने से पहले ये काम किया करते थे Nitish Bharadwaj

नई दिल्ली:  नीतीश भारद्वाज (Nitish Bharadwaj) की घर-घर तक पहचान बीआर चोपड़ा के  ‘महाभारत’ (Mahabharat) से हुई. महाभारत में श्रीकृष्ण बने नीतीश को असल जिंदगी में भी लोग कृष्ण के समान पूजनीय मानने लगे थे. बात दें कि नीतिश ‘विष्‍णु पुराण’ (Vishnu Puran) में भी भगवान विष्‍णु के कई अवतारों के रूप में नजर आ चुके हैं. 2 जून को उनके जन्मदिन पर आइए उनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों को जानें.

रेसकोर्स में थे वेटरिनेरियन
नीतीश भारद्वाज को एक्टिंग का शौक शुरू से था, लेकिन वह एक रेसकोर्स में असिस्टेंट वेटरिनेरियन के पद पर काम कर रहे थे. नितीश को घोड़ों और शेर से बेहद प्यार था. बावजूद इसके उनका इस काम में मन नहीं लगा और उनका रुझान एक्टिंग की ओर होने लगा और उन्होंने ये नौकरी छोड़ दी.

थिएटर ग्रुप से जुड़े नीतीश
नीतीश कॉलेज के टाइम से ही अपनी एक्टिंग की ललक को शांत करने के लिए के नाटकों में अभिनय और निर्देशन का काम करते थे. साथ ही वह एक थिएटर ग्रुप भी जुड़े थे. नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने इस फील्ड में ही अपने करियर को बनाने का निर्णय लिया. हालांकि उनके इस फैसले घर में तूफान आ गया था. लेकिन अपनी जिद्द के आगे वह नहीं माने.नीतीश ने अपने एक्टिंग की शुरूआत एक मराठी थिएटर से की और इसके बाद एक हिंदी थियेटर से जुड़ गए और यहां अपनी दमदार एक्टिंग से पहचान बनाना शुरू किया. साथ ही उन्होंने बॉम्बे दूरदर्शन में अनाउंसर और न्यूज रीडर का काम भी किया.

दो फिल्मों में कर चुके हैं काम
नीतीश भरद्वाज ने 1987 में मराठी और उसके बाद एक हिंदी फिल्म त्रिशंगिनी में काम किया. हालांकि ये फिल्में चली नहीं लेकिन नीतीश की इंडस्ट्रीज पहचान जरूर बन गई.

महाभारत में बनना चाहते थे अभिमन्यु
नीतीश भारद्वाज को बीआर चोपड़ा की ‘महाभारत’ में पहले विदुर का रोल मिला, लेकिन ये भी हाथ से चला गया, फिर उन्हें नकुल-सहदेव का रोल ऑफर हुआ, लेकिन ये रोल उन्हें पसंद नहीं था। असल मे वह अभिमन्यु बनना चाहते थे, लेकिन बीआर चोपड़ा को उनमें श्रीकृष्ण की झलक नजर आई और अंत में उन्हें श्रीकृष्ण का किरदार मिल गया और ये नीतीश की जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट बन गया.

सांसद भी रह चुके हैं नीतीश
नीतीश भारद्वाज बीजेपी के टिकट पर करीब 23 साल पहले जमशेदपुर सांसद बने थे, लेकिन पार्टी में अंतर्कलह के चलते वह केवल 18 महीने ही सांसद रहे. इसके बाद उन्होंने पार्टी के निर्देश पर मध्य प्रदेश के राजगढ़ से चुनाव लड़ा और जीत भी लिया. कुछ साल राजनीति में सक्रिय रहने के बाद उन्होंने राजनीति भी छोड़ दी.

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जब रुपा गांगुली तक उन्हें नहीं पहचान सकीं थीं
यह वाकया विष्णु पुराण का है. नीतीश पशुराम का रूप धारण किए थे और सेट पर पहुंची रुपा गांगुली (महाभारत में उनके साथ द्रौपदी का काम कर चुकी थीं) उन्हें नहीं पहचान सकीं. नीतीश अपने किरदार में ऐसे समा गए थे कि एक बार हेमामालिनी भी उन्हें नहीं पहचान सकी थीं, जबकि वह उन्हीं से उनके बारे में बात कर रही थी किसी और को समझ कर.

आज भी है जलवा कायम
नीतिश कुमार का जलवा आज भी कायम है. इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब के माध्यम वह अपने फैंस से जुड़े हुए हैं और महाभारत से जुड़ी रोचक जानकारी शेयर करते रहते हैं. हाल ही महाभारत को लेकर एक वीडियो शेयर किया था जो 1 करोड़ 12 लाख लोगों तक पहुंच गया था.

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