SC: तबलीगी जमात से जुडे़ विदेशी नागरिक की याचिका पर सुनवाई 24 जुलाई तक टली

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नई दिल्ली: तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) में शामिल विदेशियों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई 24 जुलाई तक के लिए टल गई है. सरकार ने कहा कि तब तक इन लोगों की स्थिति पर ज्यादा स्पष्टता आ जाएगी. इसके अलावा विदेशी जमातियों ने कोर्ट से विदेशी जमातियों ने अपने देश वापस जाने की भी इजाजत मांगी है. बता दें कि पिछली सुनवाई में सरकार ने कहा था कि इनके ऊपर कई राज्यों में केस दर्ज हैं.

गौरतलब है कि 29 जून को हुई सुनवाई में तबलीगी जमात की गतिविधियों में शामिल होने के चलते 3460 विदेशी नागरिकों को ब्लैकलिस्ट किये जाने के गृहमंत्रालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि याचिका की कॉपी सरकार को नहीं मिली है.

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वीजा रद्द किए जाने या ब्लैक लिस्ट किये जाने को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक आदेश पास नही किया गया. सिर्फ एक प्रेस रिलीज की जारी हुई और उनके पासपोर्ट जब्त कर लिए गए हैं. यहां तक कि जब जमानत की मांग को लेकर कुछ लोगों की अर्जी पर जब हाईकोर्ट में सुनवाई हुई थी, उस समय भी सरकार की ओर से ऐसा कोई आदेश पेश नहीं किया गया था.

बताते चलें कि इस याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार का ये फैसला अंसवैधानिक है क्योंकि ब्लैकलिस्ट करने से पहले ना तो उनको नोटिस दिया गया और ना ही उनका पक्ष सुना गया. गृहमंत्रालय ने तबलीगी जमात में शामिल हुए करीब 2500 विदेशी नागरिकों के भारत आने पर 10 साल का प्रतिबंध लगा दिया गया है. इनमें से बहुत से विदेशी नागरिकों को पहले ही ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था. ये सभी टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे.

मार्च में जब देश में कोरोना के मामले लगातार सामने आ रहे थे तब दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए थे. कहा गया कि उनकी वजह से अन्य लोगों में भी कोरोना वायरस बहुत ज्यादा संख्या में फैल गया था. उसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अप्रैल महीने में तबलीगी जमात के 960 विदेशी नागरिकों को ब्लैक लिस्ट कर दिया था. साथ ही इनके वीजा को रद्द कर दिया गया था. गृह मंत्रालय ने दिल्ली पुलिस व अन्य राज्यों की पुलिस से कहा था कि वह अपने-अपने क्षेत्र में रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम व विदेशी नागरिक अधिनियम के तहत कार्रवाई करें.

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