अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, बाबर ने जो किया उसे नहीं बदल सकते, हमारा मक़सद विवाद सुलझाना है

अयोध्या विवाद मामले की सुनवाई करने वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के जस्टिस एस.ए. बोबडे ने एक अहम बात कही है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्ज़िद ज़मीन विवाद मामले में मध्यस्थता को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान एस.ए. बोबडे कहा कि जो उस वक़्त बाबर ने किया, हम उसे नहीं बदल सकते। हमारा मकसद विवाद को सुलझाना है।

अयोध्या विवाद मामले में मध्यस्थता के ज़रिए विवाद सुलझाने की सुप्रीम कोर्ट की कोशिश ख़ाली गई। आज हुई सुनवाई के दौरान हिन्दु पक्षकारों ने अयोध्या विवाद मामले में मध्यस्थता करने से इनकार कर दिया। तक़रीबन एक घंटे तक चली सुनवाई के दौरान मध्यस्थता पर दोनों हिन्दु पक्षकारों के इनकारनामे के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए कहा कि बिना कोई विकल्प आज़माए मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है लेकिन, हम बेहतर भविष्य की कोशिश ज़रूर कर सकते हैं।

पक्षकारों ने पेश कीं अपनी दलीलें


एक हिंदू पक्षकार ने कोर्ट में दलील दी कि मध्यस्थता के लिए आदेश जारी करने से पहले पब्लिक नोटिस जारी करने की जरूरत होती है। हिंदू पक्षकारों ने दलील दी कि अयोध्या मामला धार्मिक और आस्था से जुड़ा मामला है। यह केवल संपत्ति विवाद नहीं है। हिंदू पक्षकार के वकील ने कहा कि मध्यस्थता से कोई फायदा नहीं, कोई तैयार नहीं होगा। इस पर मुख्यन्यायाधीश रंजन गोगोई ने कहा, अभी से यह मान लेना कि फायदा नहीं, ठीक नहीं है.

सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की तरफ से पेश हुए वकील ने मध्‍यस्‍थता के संकेत दिए। मुस्लिम पक्षकार के वकील राजीव धवन ने कहा कि हम मध्यस्थता के लिए तैयार हैं। मध्यस्थता के लिए सबकी सहमति जरूरी नहीं।

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्ज़िद ज़मीन विवाद मामले में मध्यस्थता को लेकर हो रही सुनवाई के दौरान एस.ए. बोबडे कहा कि जो उस वक़्त बाबर ने किया, हम उसे नहीं बदल सकते। हमारा मकसद विवाद को सुलझाना है। इतिहास की जानकारी हम भी रखते हैं। उन्‍होंने आगे कहा कि मध्‍यस्‍थता का मतलब किसी पक्ष की हार या जीत नहीं है ये दिल, दिमाग, भावनाओं से जुड़ा मामला है। हम मामले की गंभीरता को लेकर संजीदा हैं।