वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का हुआ निधन, पीएम और सीएम ने जताया शोक

नई दिल्ली:  वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर का 95 साल की उम्र में देहांत हो गया है. वह भारतीय पत्रकारिता जगत के मुख्य चेहरे थे. कहा यह भी जा रहा है कि कुलदीप नैयर काफी दिनों से दिल्ली के अस्पताल में आईसीयू में एडमिट भी थे. लंबे वक्त से उनकी सेहत नासाज थी. बीते दिन यानी बुधवार को उन्होंने अस्पताल में आखिर सांस ली. आज उनका लोधी रोड पर स्थित घाट में अंतिम संस्कार होगा.

पीएम मोदी का ट्वीट

राजनयिक कुलदीप नैयर की देहांत की खबर पर संवेदना व्यक्त करते हुए पीएम मोदी ने ट्वीट कर लिखा है कि कुलदीप नैयर हमारे समय का बौद्धिक विशालकाय था. एमरजेंसी के खिलाफ उनका कड़ा रुख, जनसेवा तथा बेहतर भारत के लिए उनकी प्रतिबद्धता को सदा ही याद किया जाएगा. ये ही नहीं केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उनके निधन पर शोक जताया.

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर दुख जताया

उनकी देहांत की जानकारी मिलने पर दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने भी ट्वीट कर दुख जताया और कहा वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर की खबर मिली, ये काफी दुख की बात है. वह हमेशा ही लोकतांत्रिक मूल्यों और प्रेस की स्वतंत्रता के लिए याद किए जाएंगे. उनके देहांत होने से राष्ट्र को बड़ी हानि हुई है.

कुलदीप नैयर भारत सरकार के प्रेस सूचना अधिकारी के पद पर कई सालों तक काम किया

आपको बता दें कि कुलदीप नैयर पत्रकार होने के साथ-साथ लेखक भी थे. उन्होंने कई किताबे भी लिखी. कुलदीप नैयर भारत सरकार के प्रेस सूचना अधिकारी के पद पर कई सालों तक काम करने के बाद वह पी.आई.बी, द स्टैट्समैन, यू.एन.आई और इण्डियन एक्सप्रेस  के साथ काफी समय तक जुड़े रहें थे. वे करीब पचीस सालों तक द टाइम्स’ लन्दन के संवाददाता  रहा चुके थे.

रामनाथ गोयनका स्मृ़ति पुरस्कार से सम्मानित

पत्रकारिता की दुनिया में दिग्गज पत्रकारों को अक्सर ही पुरस्कार से नवाज जाता है. ठीक 23 नवंबर, 2015 को बड़े पत्रकार एवं लेखक कुलदीप नैयर को पत्रकारिता में आजीवन उपलब्धि के लिए रामनाथ गोयनका स्मृ़ति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था. उनको यह सम्मान वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा दिया गया था. उन्होंने अगस्त, 1997 में राज्यसभा के मनोनीत सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था. उन्होंने अपनी शुरुआत उर्दू प्रेस रिपोर्टर के रूप से की थी. वह दिल्ली के समाचार पत्र द स्टेट्समैन के संपादक थे. वे एक मानवीय अधिकार कार्यकर्ता और शांति कार्यकर्ता भी रहें है. वह साल 1996 में संयुक्त राष्ट्र के लिए भारत के प्रतिनिधिमंडल के सदस्य थे.