सोनिया ने संभाला मोर्चा ।

नितीश के भाजपा के साथ जाने और सत्ताधारी दल के लगातार सियासी वार से बैकफुट पर नजर आ रहे विपक्ष को एक जुट करने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने एक बार फिर मोर्चा संभाला है। उन्होंने विपक्ष के नेताओं की एक बैठक बुलाने का फैसला किया है। यह बैठक दस अगस्त यानी कल हो सकती है। तृणमूल कांग्रेस की नेता व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का इस बैठक में शामिल होना तय माना जा रहा है। अन्य विरोधी दलों का भी बैठक में प्रतिनिधित्व होने की संभावना है।

भाजपा के खिलाफ रणनीति
जदयू के भाजपा के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद विपक्ष को फिर से जोड़ने की पहली गंभीर कोशिश कांग्रेस की ओर से की जा रही है। माना जा रहा है कि बैठक में भाजपा सरकार के कथित जनविरोधी मुद्दों को चिन्हित करके विपक्षी कुनबे को मजबूत बनाने का प्रयास होगा। सूत्रों ने कहा कि बैठक में सपा, बसपा , राजद सहित वे सभी दल शामिल हो सकते है जिन्होंने राष्ट्रपति के चुनाव के दौरान विपक्षी उम्मीदवार का साथ दिया था।

ममता को आगे करने की रणनीति

सूत्रों ने कहा कि नितीश के विपक्ष का साथ छोड़ने के बाद विरोधी दलों के कुनबे में ममता बनर्जी सबसे प्रभावी चेहरा है। पश्चिम बंगाल जैसे बड़े सूबे में वे सरकार का प्रतिनिधित्व कर रही है। ऐसे में उन्हें विपक्ष की रणनीति में केंद्रीय भूमिका में लाकर मोर्चे के धार को धार देने की रणनीति बनाई जा रही है।

सत्र के बाद प्रकट होंगे विरोधी दल
गौरतलब है इससे पहले राष्ट्रपति व उपराष्ट्रपति चुनाव में ममता बनर्जी ने अपना पार्टी की ओर से विरोधी दल के उम्मीदवार का समर्थन किया था, लेकिन वे रणनीति बैठकों में खुद शामिल नहीं हुई थी। उनकी जगह पार्टी के दूसरे नेताओं ने बैठक में हिस्सा लिया था।, लेकिन अब ममता बनर्जी की खुद सोनिया गाँधी की मुलाक़ात अहम मानी जा रही है। संसद का मौजूदा सत्र 11 अगस्त को समाप्त हो रहा है। संसद के बाहर विपक्ष को लामबंद करने के लिए मंथन शुरू करना कांग्रेस की दूरगामी रणनीति की हिस्सा हो सकता है।

तालमेल बढ़ाने पर जोर
सूत्रों का कहना है कि विपक्षी दलों के नेता संसद सत्र समाप्त होने के बाद आपसी तालमेल बनाये रखने पर चर्चा करेंगे। बैठक में इस बात पर जोर होगा कि बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के सूबे में महागठबंधन से अलग होने के बाद विपक्षी दल से कैसे मुकाबला किया जाए।