क्या इतिहास है हजरत निजामुद्दीन दिल्ली मरकज का

निजामुदद्ीन मरकज
निजामुदद्ीन मरकज

क्या इतिहास है हजरत निजामुद्दीन दिल्ली मरकज का

कोरोना वायरस के मामले पूरे देश में लगातार बढ़ते जा रहें हैं. सरकार इनको रोकने की अपनी तरफ से जी-जान से कोशिस कर रही है. इसी बीच तब्लीगी जमात का एक आयोजन जो दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में स्थित मरकज में आयोजित किया गया था सुर्खियों में आ गया. इन पर आरोप है कि इन्होनें सरकार के निर्देशों का पालन नहीं किया. जिसके कारण नियंत्रण में चल रही कोरोना वायरस की स्थिती नियंत्रण से बाहर होती दिखाई दे रही है.

इसका इतिहास जानने से पहले हम जो शब्द प्रयोग हो रहे हैं, उनका अर्थ देखते हैं, ताकि आगे हमें समझने में सुविधा हो सकें.

तब्लीगी, जमात और मरकज ये तीनों अलग-अलग शब्द हैं. तब्लीगी शब्द जो  अल्लाह के संदेशों का प्रचार करता है उसके लिए प्रयोग किया जाता है. जमात शब्द का अर्थ होता है कि समूह तथा इनकी बैठक आयोजित करने की जगह को मरकज कहा जाता है.

निजामुद्दीन मरकज को बंगलेवाली मस्जिद भी कहते हैं. यह निजामुद्दीन के पश्चिम में दक्षिण दिल्ली में स्थित है. यह तब्लीगी जमात का मुख्यालय भी है.इस 6 मंजिला बिल्डिंग में लोग एक साथ बैठकर धर्म की बातें करते हैं.

तब्लीगी जमात विश्व में सुन्नी इस्लाम के प्रचार के लिए किया गया आंदोलन था. जो मुस्लमानों को प्राचीन इस्लाम पद्दतियों की ओर जाने के लिए प्रेरित करता है. जमात के छह मुख्य उद्देश्य या “छ: उसूल” हैं (कलिमा, सलात, इल्म, इक्राम-ए-मुस्लिम, इख्लास-ए-निय्यत, दावत-ओ-तब्लीग) हैं. आज यह 213 देशों तक फैल चुका है.

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तबलीगी जमात आंदोलन 1927 में मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने भारत में हरियाणा के नूंह जिले के गांव से शुरू किया था. हरियाणा के नूंह से वर्ष 1927 में शुरू हुई तब्लीगी जमात की पहली मरकज 14 साल बाद हुई थी.

साल 1941 में 25 हजार लोगों के साथ पहली बैठक हुई थी.तब्लीगी जमात भारत के प्रमुख कोरोनोवायरस हॉटस्पॉट में से एक के रूप में उभरा.

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