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विधवा महिला से कोर्ट मैरिज करने के लिए कौन सी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पडता है ?

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विधवा महिला से कोर्ट मैरिज करने के लिए कौन सी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पडता है What is the legal process to go through for court marriage with a widow woman
विधवा महिला से कोर्ट मैरिज करने के लिए कौन सी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पडता है What is the legal process to go through for court marriage with a widow woman

विधवा महिला से कोर्ट मैरिज करने के लिए कौन सी कानूनी प्रक्रिया से गुजरना पडता है ? ( What is the legal process to go through for court marriage with a widow woman? )

भारत में अगर कोई लड़का या लड़की शादी करना चाहते हैं, तो उनकी कोर्ट मैरिज 1954 के मैरिज एक्ट के अनुसार पूरी की जाती है. कोर्ट मैरिज करवाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होता है कि लड़की की उम्र कम से कम 18 तथा लड़के की उम्र कम से कम 21 होनी जरूरी होती है. लेकिन काफी लोगों के मन में सवाल होता है कि क्या कोई विधवा महिला कोर्ट मैरिज करवाना चाहती है, तो उसके लिए क्या कानूनी प्रक्रिया होती है. अगर आपके मन में भी यहीं सवाल है, तो इस पोस्ट में आपके सवाल का जवाब मिल जाएगा.

कोर्ट मैरिज

कोर्ट मैरिज क्या है –

समाज की रूढ़ीवादी सोच के कारण काफी बार लोग शादी को अनुमति नहीं देते हैं या फिर वर्तमान समय में लोग शादी को साधारण तरीके से करने के लिए कोर्ट मैरिज कराते हैं. इसमें शादी के लिए कुछ शर्ते निर्धारित की गई हैं. जैसे कि लडकी की उम्र कम से 18 तथा लडके की उम्र कम से कम 21 वर्ष , पहले से आप शादी के बंधन में ना बंधे हों. जिनको पूरी करने के बाद आपकी शादी संपन्न करा दी जाती है. इसके साथ ही आपको शादी का प्रमाण पत्र भी दे दिया जाता है. जिससे आप कानूनी तौर पर पत्ति और पत्नि बन जाते हैं. यह शादी 1954 के मैरिज एक्ट के अनुसार संपन्न होती है.

कोर्ट मैरिज

क्या विधवा से शादी कर सकते हैं तथा प्रक्रिया-

सरकार की तरफ से विधवा विवाह के लिए प्रोत्साहित भी किया जाता है. विधवा का विवाह भी कोर्ट मैरिज के अंतर्गत हो सकता है. इसके लिए विवाह प्रक्रिया में कोई ज्यादा अंतर नहीं होता है. सबसे पहले विवाह अधिकारी को लिखित में सूचित किया जाता है. इसके बाद विवाह अधिकारी सूचना को प्रकाशित करवाता है. जिसमें 30 दिन का समय दिया जाता है. अगर कोई आपत्ति दर्ज कराता है, तो उसकी जांच होती है. इसके बाद कोई आपत्ति दर्ज नही की जाती है, तो 3 गवाह की जरूरत होती है. जिसके बाद आपकी शादी संपन्न कर दी जाती है. विधवा के कोर्ट मैरिज में जो मुख्य अंतर होता है, वह यह होता है कि शादी के समय अपने पति का मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करवाना होगा. इसके बाद ही विधवा महिला की शादी की प्रक्रिया कोर्ट मैरिज के अंतर्गत संपन्न हो पाती है.

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कोर्ट मैरिज के लिए परिवार के लोगों की सहमती की आवश्यकता नहीं है. हालांकि आप विवाह अधिकारी की उपस्थिति में शादी कर रहे होते हैं, लेकिन जब कोर्ट मैरिज होती है, तो उसमें तीन गवाह की जरूरत होती है. उसके बाद ही आपकी कोर्ट मैरिज संपन्न हो सकती है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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