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दिल्ली के किस सुल्तान ने अमानवीय दंड देना बंद कर दिया था ?

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दिल्ली के किस सुल्तान ने अमानवीय दंड देना बंद कर दिया था Which Sultan of Delhi stopped giving inhuman punishment
दिल्ली के किस सुल्तान ने अमानवीय दंड देना बंद कर दिया था Which Sultan of Delhi stopped giving inhuman punishment

दिल्ली के किस सुल्तान ने अमानवीय दंड देना बंद कर दिया था ? ( Which Sultan of Delhi stopped giving inhuman punishment ? )

दिल्ली के सुल्तानों का काल भारत के मध्यकालीन इतिहास से संबंधित है. दिल्ली सल्तनत की बात करें, तो इसमें 5 वंशों ने शासन किया है. जिससे संबंधित अनेंक तरह की रोचक जानकारी भी हमें इतिहास से मिलती है. मध्यकालीन इतिहास में वर्तमान समय की तरह न्यायालय नहीं होते थे. उस समय सुल्तान की इच्छा या फैसला ही कानून होता था. इसी कारण काफी कुछ सुल्तान की इच्छा पर निर्भर करता था. दिल्ली सल्तनत काल में अनेंक अमानवीय दंड भी दिए जाते हैं. इसी कारण लोगों के मन में सवाल होता था कि ऐसा कौन सा सुल्तान था, जिसने अमानवीय दंड देना बंद कर दिया. इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

फिरोजशाह तुगलक

अमानवीय दंड क्या होता है –

इस सवाल का जवाब जानने से पहले हमारे लिए इसे समझना जरूरी है कि अमानवीय दंड क्या होता है. अगर इसकी परिभाषा की जगह साधारण शब्दों में इसको समझे तो इसका अर्थ होता है कि जब किसी को दंड देना का तरीका या दंड का प्रकार ऐसा हो जैसा मानव के साथ नहीं किया जाना चाहिएं. उसे अमानवीय दंड कहा जाता है. उदाहरण के लिए आपने सुना होगा कि इतिहास में विरोध करने वाले को चौराहे पर मारकर लटका दिया जाता था या फिर किसी का हाथ काटने या आंख फोड़ने का आदेश दे दिया जाता था. इस तरह के दंड को अमानवीय दंड कहा जाता है.

इतिहास

किस सुल्तान ने अमानवीय दंड देना बंद कर दिया –

मोहम्मद बिन तुगलक के बाद फिरोजशाह तुगलक दिल्ली की गद्दी पर बैठा. उसने 1356 से लेकर 1388 ईं. तक शासन किया. फिरोजशाह तुगलक ने ही दंड संहिता को संशोधित करके उसे अधिक मानवीय बनाया या कह सकते हैं कि अमानवीय दंड देना बंद कर दिया.

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इसके अलावा फिरोजशाह तुगलक ने बेरोजगारों के लिए उसने ‘दफ्तर-ए-रोजगार’ नामक विभाग की स्थापना की और इसके साथ ही फतेहाबाद, हिसार, फिरोजपुर, जौनपुर तथा फिरोजाबाद शहरों की भी स्थापना की थी. फिरोज तुगलक का आदर्श वाक्य था- ‘खजाना बड़ा होने से अच्छा है लोगों का कल्याण. दुःखी हृदयों से अच्छा का खाली खजाना.“

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