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भारतीय इतिहास को हिंदू-मुस्लिम के रूप में किसने और क्यों बांटा ?

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इतिहास
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भारतीय इतिहास को हिंदू-मुस्लिम के रूप में किसने और क्यों बांटा ? ( Who divided Indian history as Hindu-Muslim and why? )

भारतीय इतिहास को अच्छे से समझने के लिए हम इतिहास को कई तरह से विभाजित करते हैं. कुछ विद्वान भारत के इतिहास को प्राचीन भारत , मध्यकालीन भारत और आधुनिक भारत के तौर पर भारत का इतिहास विभाजित करते है. इसके साथ ही कुछ इतिहासकारों ने भारत के इतिहास को हिंदू शासक , मुस्लिम शासक तथा ब्रिटिस शासन के अनुसार भी विभाजित किया है. हालांकि इस तरह के विभाजन को इतिहास में ज्यादा मान्यता नहीं दी जाती है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम शासको के धर्म के आधार पर यदि इतिहास का विभाजन करते हैं, तो बाकी पहलू अछूते रह जाते हैं.

जेम्स मिल

भारतीय इतिहास को हिंदू-मुस्लिम के रूप में किसने बांटा-

भारतीय इतिहास के हिंदू-मुस्लिम के रूप में विभाजन की बात करें, तो इस तरह सबसे पहले एक स्काटिश अर्थशास्त्री और राजनैतिक दार्शनिक जेम्स मिल ने किया था. 1817 में उसने अपनी पुस्तक “ब्रिटिश भारतीय इतिहास” को तीन खंड में विभाजित किया. इसी में उन्होंने भारतीय इतिहास को तीन भागों में विभाजित किया. हिंदू काल, मुस्लिम काल तथा ब्रिटिश काल.

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भारतीय इतिहास को हिंदू-मुस्लिम काल में क्यों बांटा-

इस सवाल का जवाब जानने से पहले हमें ध्यान रखना जरूरी है कि इतिहासकार कहीं ना कहीं किसी ना किसी विचारधारा से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता है. इसके अलावा कुछ इतिहासकार राजनैतिकतौर पर किसी विचारधारा या लाभ के लिए  भी इतिहास को इस तरह से लिखते हैं. जिसके कारण उनके छुपे हुए उद्देश्य पूरे हो सकें. भारतीय इतिहास को हिंदू-मुस्लिम काल में विभाजित करना भी कहीं ना कहीं एक सांप्रदायिक विचारधारा से जुड़ा होना प्रदर्शित करता है. कुछ इतिहासकारों को इसके पीछे हिंदू और मुस्लिम समुदाय में फूट डालने के हथियार के तौर पर भी देखा जाता है.

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देश की आजादी के समय हमें अपने इतिहास के बारे में 2 तरह की धारणाएं विरासत में मिली थीं। पहली थी औपनिवेशिक और दूसरी थी राष्ट्रवादी. औपनिवेशिक धारा का मुख्य उद्देश्य यह था कि वह भारतीय इतिहास की कमियों के आधार पर भारतीयों में हीन भावना बनाए. इसके अलावा हिंदू और मुस्लिम समुदाय में संघर्ष बढ़ाने के लिए इस तरह से हिंदू , मुस्लिम और ब्रिटिस शासन के तौर पर काल का विभाजन किया गया. जिसमें हिंदू काल को अच्छा , मुस्लिम काल को बर्बरता तथ ब्रिटिस काल को आधुनिकता लाने वाले काल के तौर पर दर्शाया. इसके अलावा उन्होंने यह भी दिखाने की कोशिश की हिंदू तथा मुस्लिम काल में भारत में निरंकुश शासन ही रहा है. राष्ट्रवादी शासको ने इस तरह के सांप्रदायिक विभाजन का विरोध किया. लेकिन 20 वीं शताब्दी में राष्ट्रीय आंदोलन के समय भी सांप्रदायिक इतिहासकारों ने अपने अपने राजनैतिक स्वार्थ के लिए इतिहास का सहारा लिया.

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