जानें सभी राजनीतिक दलों को चुनाव चिन्ह क्यों दिए जाते हैं

चुनाव चिन्ह
चुनाव चिन्ह

जानें सभी राजनीतिक दलों को चुनाव चिन्ह क्यों दिए जाते हैं

भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है. यहां हमेशा कहीं ना कहीं किसी ना किसी स्तर पर चुनाव होते रहते हैं. अगर आपने भी कभी वोट डाला है, तो जब आप वोट डालने जाते हैं तो आपको मतदान केंद्र में विभिन्न राजनैतिक दलों के चुनाव चिन्ह दिखाई दिए होगें या चुवाव के समय जब प्रचार होता है तो उम्मीदार चुनाव चिन्ह की चर्चा जरूर करते हैं. तो क्या आपने कभी सोचा है कि चुनाव चिन्ह की शुरूआत क्यों करनी पड़ी. इनका चुनाव में क्या महत्व हैं. चलिए आज फिर इन्ही सवालों का जवाब जानने की कोशिश करते हैं.

राजनीतिक दलों के चुनाव
राजनीतिक दलों के चुनाव

आपको बता दें जब 15 अगस्त , 1947 को जब भारत देश आजाद हुआ था. उस समय भारत के लोगों की साक्षरता दर बहुत कम थी. जब 1951 में पहली बार चुनाव हुए , तो इस बात को महसूस किया गया कि अगर किसी पार्टी का नाम मतदान केंद्र में होगा या उम्मीदवार का नाम तो भारत के लोग उसको समझ नहीं पाएंगें. मतदाता ये पता नहीं लगा पाएंगें कि उनकों किसे वोट करना है. उस समय जो चुनाव चिन्ह होते थे वो भी ऐसे ही होते थे जो लोगों के आम जीवन से जुड़े होते थे. जैसे कि बैल , दरांती , हल इत्यादी.

राजनीतिक दलों के चुनाव
राजनीतिक दलों के चुनाव

इसके अलावा एक कारण यह भी होता है कि मान लो 2 उम्मीदवार चुनाव लड़ते हैं तथा उन दोनों का नाम बिल्कुल समान होता है. तो ऐसी स्थिति में मतदाता के सामने समस्या आ जाती है कि उसका उम्मीदवार कौन सा है. इस भ्रम को दूर करने के लिए भी चुनाव चिन्ह का अपना विशेष महत्तव है.

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उपरोक्त कारणों से ही चुनाव के लिए राजनैतिक पार्टियों को चुनाव चिन्ह दिए जाते हैं और इनका अपना विशेष महत्तव होता है.

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