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1911 में दिल्ली को ही अंग्रेजो द्वारा भारत की राजधानी क्यों बनाया गया ?

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1911 में दिल्ली को ही अंग्रेजो द्वारा भारत की राजधानी क्यों बनाया गया Why was Delhi made the capital of India by the British in 1911
1911 में दिल्ली को ही अंग्रेजो द्वारा भारत की राजधानी क्यों बनाया गया Why was Delhi made the capital of India by the British in 1911

1911 में दिल्ली को ही अंग्रेजो द्वारा भारत की राजधानी क्यों बनाया गया ? ( Why was Delhi made the capital of India by the British in 1911? )

आमतौर पर यह धारणा होती है कि इतिहास बहुत ही बोरिंग विषय होता है. इसका कारण दिया जाता है कि इसमें हमें बहुत सी तारीख याद रखनी पड़ती हैं. लेकिन अगर हम इतिहास को समझते हैं, तो यह हमारी समझ को बेहतर बनाने के साथ साथ हमें इतिहास की घटना के पीछे के कारण भी समझता है. आपको इस सवाल का जवाब आसानी से मिल जाता है कि 1911 में अंग्रेजों द्वारा भारत की राजधानी दिल्ली को बनाया गया. लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली को ही क्यों बनाया गया ? अगर आपके मन में भी यहीं सवाल है, तो इस पोस्ट में आपको आपके सवाल का जवाब मिल जाएगा.

दिल्ली

1911 में कलकत्ता से दिल्ली में राजधानी क्यों ?

दिल्ली को ही अंग्रेजों ने भारत की राजनधानी क्यों बनाया. इस सवाल का जवाब जानने से पहले हमारे लिए यह जानना आवश्यक हो जाता है कि कलकत्ता जो 1911 तक भारत की राजधानी थी, उसे क्यों बदलना पड़ा. इसके लिए कुछ साल पहले 1905 में लार्ड कर्जन द्वारा किया गया बंगाल का विभाजन भी कुछ हद तक उत्तरदायी था. दरअसल 1905 में लार्ड कर्जन ने बंगाल का विभाजन कर दिया था. जिसके बाद बंगाल में उग्र क्रांतिकारी गतिविधियां शुरू हो गई थी. जिसके कारण लगभग पूरे बंगाल में अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन चलने लगे. लेकिन जहां कांग्रेस इस विभाजन के खिलाफ थी. वहीं मुस्लिम लीग ने इस विभाजन का समर्थन किया था. मुस्लिम लीग के समर्थन करने के पीछे के कारण की बात करें, तो अंग्रेज फूट डालों और शासन करो कि नीति के तहत उस समय मुस्लिम समुदाय के लोगों को खुश करने की कोशिश करते थे. इसी के तहत 1909 में आए अधिनियम में मुस्लिम समुदाय के अलग निर्वाचन की मांग को स्वीकार कर लिया गया.

कुतुबमीनार

इसके अलावा उस समय मुस्लिम लीग भी यहीं चाहती थी कि सरकार के खिलाफ आंदोलन में भाग लेने की बजाय इनका समर्थन करके हम अपने समुदाय का ज्यादा विकास कर सकते हैं. बंगाल विभाजन के बाद बने क्रांतिकारियों के उग्र महौल की वजह से ऐसी जगह पर राजधानी को रखना किसी भी शासन के हित में नहीं हो सकता था. इसी कारण कलकत्ता से राजधानी को दिल्ली स्थानांतरित कर दिया.

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दिल्ली को ही क्यों बनाया गया राजधानी –

दिल्ली में मध्यकाल में मुस्लिम शासको का शासन रहा है. इसी कारण यहां मुस्लिम समुदाय के लोग ज्यादा थे. जिनपर कांग्रेस की जगह मुस्लिम लीग का प्रभाव ज्यादा था. इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय के प्रति अंग्रेजों ने इस दौर में उदारता का व्यवहार किया. इसलिए मुस्लिम लीग अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलनों में भाग नहीं लेती थी. इसके अलावा दिल्ली मध्यकाल में राजधानी के रूप में रही है, तो यहां उनको पूरी तरह से व्यवस्था स्थापित करने की भी आवश्यकता नहीं होती. इसी कारण कलकत्ता से राजधानी को स्थानांतरित करने के लिए अंग्रेजों के पास दिल्ली से अच्छा विकल्प कोई हो ही नहीं सकता था.

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